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मदरसे में मिली जाली नोट छापने की मशीन और आरएसएस से जुड़ी कई किताबें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. प्रयागराज के अतरसुइया थाना क्षेत्र के एक मदरसे से 28 अगस्त को नकली नोट की फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद अब जैसे-जैसे जांच एजेंसियां अपनी जांच का दायरा आगे बढ़ाने में जुटी हुई है. वैसे-वैसे जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है जिसने प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस के साथ-साथ जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए है. अब पुलिस की जांच में नकली नोट वाले मदरसे में आपत्तिजनक किताबें मिलने से सनसनी फैल गई है. दरअसल मदरसे में अब आरएसएस के खिलाफ आपत्तिजनक किताबें मिली है. ये किताबें गिरफ्तार किए गए कार्यवाहक प्रिंसिपल मौलवी तफसीरुल के कमरें में मिली है. इन किताबों में आपत्तिजनक किताबें, तस्वीरें, आरएसएस को देश का सबसे बड़ा आतंकी संगठन लिखा गया है.

बता दें कि प्रयागराज के अतरसुइया इलाके में मशहूर मदरसा जामिया हबीबिया मस्जिद ए आजम में जाली करेंसी छापने के साथ ही एक और बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है. इस मदरसे में छापेमारी के दौरान पुलिस टीमों को आरएसएस से जुड़ी कई किताबें मिलीं हैं. मदरसे के प्रिंसिपल मौलवी मोहम्मद तफसीरुल आरीफीन के कमरे में आरएसएस के ऊपर लिखीं गईं आपत्तिजनक किताबें, तस्वीरें मिलने के बाद मामले और गंभीर हो गया है. इन किताबों में आरएसएस को देश का सबसे बड़ा आतंकी संगठन कहा गया है. अब इसे लेकर बवाल खड़ हो गया है.

खुफिया एजेंसियों ने इसे लेकर जांच तेज कर दी है. शक है कि मदरसे में पढ़ने वाले कई राज्यों के बच्चों को आरएसएस को आतंकी संगठन बताकर ब्रेन वॉश किया जा रहा था।किताब के लेखक एसएम मुशर्रफ महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व आईजी है. किताब में मुम्बई 26/11 हिन्दू अटैक बताया गया है. पाकिस्तान के डॉन अखबार ने किताब की तारीफ में लेख लिखा था. डॉन ने लिखा कि इंडिया का एक आईजी खुद कह रहा है कि ये हमला पाकिस्तान ने नही किया था. किताब उर्दू में लिखी गयी है. पुलिस ने इसका हिंदी में अनुवाद करवाया है.

पुलिस के मुताबिक ये मदरसा बरेलवी सेक्ट से जुड़ा हुआ है. हिंदी अनुवाद की कॉपी भी भेजी गई है. अब आपत्तिजनक किताब मिलने के बाद आज मदरसे में पुलिस के अलावा इंटेलिजेंस से जुड़े लोग भी यहां जांच करने पहुंचे है.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।