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जीत गया अलगाववादी नेता राशिद शेख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं। इन नतीजों में जो सबसे हैरान कर देने वाली बात थी वह ये कि कुछ उम्मीदवार जेल में रहते हुए भी सांसद का चुनाव जीत चुके हैं। इनमें दो लोगों का नाम है जिनके चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया। पहला नाम अलगाववादी नेता राशिद शेख का है जिसने जम्मू-कश्मीर में दो-दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला को हरा दिया। वहीं, दूसरा नाम कट्टर खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह का है।

उमर अबदुल्ला को हराने वाला शख्स

सबसे पहले बात कर लेते हैं जम्मू-कश्मीर के बारामूला सीट पर दमदार जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार राशिद शेख की। राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशीद ने बारामूला सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उन्हें कुल 4 लाख 69 हजार 574 वोट मिले हैं। राशिद ने अपने प्रतिद्वंदी उमर अबदुल्ला को 2 लाख 32 हजार 73 वोटों से हराया है। इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अबदुल्ला को 2 लाख 66 हजार 301 वोट मिले हैं। उमर अबदुल्ला ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। बता दें कि राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशीद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है और वह जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चुनाव में जीतने वाले राशिद पर टेरर फंडिंग लेने का आरोप है। उस पर UAPA एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगे हुए हैं। राशिद शेख के जेल में रहते हुए उसके दोनों बेटों ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी।

खडूर साहिब से जीता अमृतपाल सिंह

अब बात कर लेते हैं जेल में बंद रहते दूसरे उम्मीदवार के जीतने की। इस उम्मीदवार ने पंजाब के खडूर साहिब लोकसभा सीट से जीत हासिल की है। यह उम्मीदवार कट्टरपंथी सीख उपदेशक और खालिस्तानी समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख अमृतपाल सिंह है। अमृतपाल सिंह खडूर साहिब लोकसभा सीट से करीब 1 लाख 90 हजार वोटों से आगे चल रहा है। अमृतपाल सिंह ने भी यह चुनाव निर्दलीय लड़ा था। फिलहाल वह असम के जेल में बंद है। अमृतपाल को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।