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नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान तिब्बती प्रदर्शन: चीन की नीति और मानवाधिकारों पर उठे गंभीर सवाल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
नई दिल्ली । 
18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 7 वर्षों के बाद हुई भारत यात्रा कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इस यात्रा के दौरान राजधानी नई दिल्ली में तिब्बती समुदाय और मानवाधिकार संगठनों द्वारा व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
प्रदर्शनकारियों ने चीन द्वारा तिब्बत में लागू की जा रही दमनकारी नीतियों, सांस्कृतिक विनाश और हाल ही में प्रभावी हुए ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ (जातीय एकता कानून) के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

प्रदर्शन के मुख्य केंद्र और सुरक्षा बलों की कार्रवाई

नई दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद तिब्बती कार्यकर्ताओं ने कई प्रमुख स्थानों पर विरोध दर्ज कराया:
  • प्रगति मैदान एवं भारत मंडपम क्षेत्र: शिखर सम्मेलन स्थल के निकट प्रगति मैदान टनल में ‘स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत’ (SFT) के कार्यकर्ताओं ने पोल पर चढ़कर चीनी प्रतिनिधिमंडल के पोस्टरों को हटाने का प्रयास किया तथा “Xi Jinping = Genocide” और “Free Tibet” जैसे नारों वाले बैनर लहराए।
  • मजनू का टीला प्रदर्शन मार्च: उत्तरी दिल्ली स्थित तिब्बती शरणार्थी बस्ती मजनू का टीला में ‘तिब्बती युवा कांग्रेस’ (TYC) के बैनर तले सैकड़ों तिब्बतियों ने शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला।

दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत

सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की:
  1. शुरुआती कार्रवाई में प्रगति मैदान से 5 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
  2. इसके बाद तिब्बती युवा कांग्रेस के 60 से अधिक कार्यकर्ताओं को भैरव मार्ग और आसपास के क्षेत्रों से हिरासत में लेकर अलग-अलग पुलिस स्टेशनों (मंडावली, अशोक विहार, गाजीपुर आदि) में भेजा गया।

तिब्बती संगठनों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों और निर्वासित तिब्बती संसद के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और BRICS देशों के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं:
  1. एथनिक यूनिटी कानून की वापसी: चीन द्वारा जुलाई 2026 से लागू किए गए इस कानून को रद्द करने की मांग, जो तिब्बती सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को समाप्त करने का प्रयास करता है।
  2. कैदियों की रिहाई: चीन की जेलों में बंद सभी तिब्बती राजनीतिक कैदियों को अविलंब रिहा किया जाए।
  3. सच्ची वार्ता की शुरुआत: दलाई लामा के प्रतिनिधियों और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के साथ चीन बिना किसी पूर्व शर्त के सार्थक बातचीत शुरू करे।
  4. BRICS मंच पर चर्चा: BRICS सदस्य देश चीन के साथ द्विपक्षीय बैठकों में तिब्बत के मानवाधिकारों और जल सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: नई दिल्ली में तिब्बती समुदाय ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
उत्तर: तिब्बती समुदाय ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा का विरोध किया। वे चीन की दमनकारी तिब्बत नीति, मानवाधिकार उल्लंघनों और नए एथनिक यूनिटी कानून का विरोध कर रहे थे।
Q2: प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
उत्तर: सुरक्षा बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रगति मैदान टनल और भैरव मार्ग से 60 से अधिक तिब्बती कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
Q3: तिब्बती युवा कांग्रेस (TYC) की मुख्य मांग क्या थी?
उत्तर: उनकी मुख्य मांग तिब्बत की स्वतंत्रता, चीन के नए ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ की वापसी, धार्मिक हस्तक्षेप की समाप्ति और तिब्बती राजनीतिक कैदियों की रिहाई थी।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान नई दिल्ली में हुए तिब्बती विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी उपलब्ध समाचार रिपोर्टों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और आधिकारिक पुलिस बयानों पर आधारित एक सूचनात्मक विश्लेषण है। इसका उद्देश्य किसी भी राजनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करना नहीं बल्कि निष्पक्ष समाचार प्रदान करना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।