लोड हो रहा है...

हरियाणा की जीत से उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं में भी उपचुनाव के लिए मिला उत्साह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावों के नतीजों का यूपी की राजनीति पर भी सीधा और गहरा असर होगा। यहां के नतीजे, लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली हार और एग्जिट पोल के नतीजों से हतोत्साहित भाजपा का यूपी में न केवल मनोबल बढ़ाएंगे, बल्कि उत्साह के साथ आगे बढ़ने की ताकत भी मिलेगी। वहीं, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में सीटों के बंटवारे को लेकर INDI गठबंधन में शुरू हुई तकरार से यूपी में सपा और कांग्रेस के राजनीतिक रिश्तों पर भी असर पड़ेगा।

जीत से बढ़ेगा BJP कार्यकर्ताओं का उत्साह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजों से भाजपा के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। विधानसभा की 10 सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा की राह अब पहले से आसान होगी। लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा की हार के बाद से सरकार के मंत्रियों से लेकर कार्यकर्ताओं तक का मनोबल गिर गया था। आरक्षण और संविधान को लेकर विपक्ष की ओर से भाजपा के खिलाफ सेट नरेटिव के बीच सरकार के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता भी खुले आम कहने लगे थे कि 2027 का चुनाव आसान नहीं होने वाला है।

उप चुनाव में हो सकता है BJP को फायदा

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर चुनाव की घोषणा से लेकर एग्जिट पोल तक जिस तरह माहौल भाजपा के खिलाफ बना था, उससे भी कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव आने लगा था। लेकिन, हरियाणा में भाजपा को मिली अप्रत्याशित जीत और जम्मू-कश्मीर में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन ने यूपी में भी भाजपा और योगी सरकार को शक्ति दी है। इससे बीजेपी में नया आत्मविश्वास आएगा। दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम से आगामी विधानसभा उप चुनाव में भाजपा के पक्ष में माहौल बनेगा। वहीं, जो कार्यकर्ता सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर ऊर्जा मिलेगी।

साभार : अमर उजाला

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।