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देवी दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई हिंसा, एसपी सहित कई पुलिसवाले घायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रांची. झारखंड के गढ़वा में रविवार (13 अक्टूबर) को दुर्गा पूजा की मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई हिंसा के बाद तनाव बरकरार है. प्रशासन ने लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से मूर्ति विसर्जन की सलाह दी है. पुलिस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए हैं. इसके साथ ही एसपी सहित कई पुलिसकर्मी भी जख्मी हैं. इस घटना के बाद पूरे मतगड़ी के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. तनाव के दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा है. बताया जा रहा है कि पुलिस की ओर से लाठीचार्ज के बाद ग्रामीणों ने पथराव करके पुलिस को खदेड़ दिया. बताया जा रहा है कि मामला रास्ते के विवाद को लेकर था, जहां मूर्ति विसर्जन को लेकर एक विशेष समुदाय से विवाद हो गया. जिससे लोगों ने पथराव कर दिया.

गढ़वा में स्थिति अब नियंत्रण में- एसपी

डीसी और एसपी ने लोगों को शांति पूर्ण रूप से मूर्ति विसर्जन करने क़ी सलाह दी है. जानकारी के मुताबिक पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया है. हालांकि एसपी के अनुसार स्थिति अब नियंत्रण में है. जो बाहरी लोग शामिल हुए थे, उन्हें खदेड दिया गया है. इस घटना में एएसपी अभियान घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि पूजा समिति के लाइसेंस में जिस रूट से विसर्जन किये जाने का जिक्र है. उस रास्ते पर एक विशेष समुदाय की ओर से आपत्ति दर्ज की गई है. इसी के बाद हिंसा की घटना हुई है.

बातचीत के लिए पूजा समिति को प्रशासन ने बुलाया

गढ़वा जिले के भंडरिया थाना क्षेत्र के मदगड़ी गांव में प्रतिमा विसर्जन को लेकर पूजा समिति के द्वारा अभी तक प्रतिमा विसर्जन नहीं किया गया है. स्थिति कंट्रोल में है. इधर वार्ता के लिए पूजा समिति को डीसी और एसपी ने बुलाया है. इस मामले पर डीसी एसपी ने कहा, ”हमलोगों ने शांति के लिए अपील की है. असामाजिक तत्वों द्वारा यह हंगामा किया गया है. हमारे अभियान एसपी घायल हो गए हैं.”

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।