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बड़गाईं जमीन घोटाला: सीएम हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से झटका, PMLA कोर्ट में जारी रहेगी कार्यवाही

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
रांची । 
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाई कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। हाई कोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने निचली अदालत (विशेष PMLA कोर्ट) में चल रही आपराधिक कार्यवाही और ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार करते हुए हेमंत सोरेन की अंतरिम याचिका (I.A. No. 12139/2026) को खारिज कर दिया है।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद रांची स्थित विशेष PMLA कोर्ट में आरोप तय करने (Charges Frame) की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है पूरा बड़गाईं जमीन विवाद?

यह पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल की लगभग 8.86 एकड़ विवादित जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जीवाड़ा से जुड़ा है।
  • ईडी के आरोप: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर इस कीमती जमीन पर अवैध कब्जा किया गया। ईडी ने हेमंत सोरेन समेत लगभग 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। जांच एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री पद के प्रभाव का इस्तेमाल कर समानांतर दस्तावेज तैयार करवाए गए।
  • सोरेन पक्ष का बचाव: हेमंत सोरेन की कानूनी टीम का तर्क है कि वे इस जमीन के आधिकारिक मालिक नहीं हैं और न ही उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का प्रत्यक्ष साक्ष्य (Direct Evidence) मौजूद है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: धारा 197 CrPC का तर्क क्यों खारिज हुआ?

हेमंत सोरेन की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई थी कि यह मामला पुरानी कार्यवाही से जुड़ा है, इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की जगह पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 लागू होगी। इसके तहत लोक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल से पूर्व स्वीकृति (Prosecution Sanction) अनिवार्य है।
हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए मुख्य बिंदु स्पष्ट किए:
  1. आधिकारिक दायित्व से संबंध नहीं: अदालत ने कहा कि धारा 197 का संरक्षण केवल तब मिलता है जब किया गया कृत्य आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ा हो। प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी होना सरकारी काम का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
  2. ट्रायल का विषय: पूर्व स्वीकृति (Sanction) का सवाल कानून और तथ्यों का मिश्रित प्रश्न (Mixed question of law and facts) है, जिस पर मुकदमा/ट्रायल चलने के दौरान साक्ष्यों के आधार पर विचार किया जा सकता है।
  3. ट्रायल रोकना अनुचित: केवल स्वीकृति न मिलने के आधार पर इस मोड़ पर ट्रायल रोकना उचित नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

  • PMLA अदालत में आरोप तय: रांची की विशेष PMLA अदालत में सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी 8 जून 2026 को ही खारिज हो चुकी थी। स्टे खारिज होने के बाद 19 सितंबर को PMLA कोर्ट में आरोप तय करने (Charges Framing) की अगली न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
  • मुख्य याचिका पर सुनवाई बरकरार: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम राहत की याचिका पर निर्णय है। सोरेन की मुख्य क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन (No. 982/2026) पर 14 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी।

संबंधित खबरें एवं रेफरेंस

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या हाई कोर्ट का यह फैसला हेमंत सोरेन के खिलाफ अंतिम निर्णय है?
उत्तर: नहीं, यह केवल अंतरिम राहत (Interim Stay) की याचिका पर फैसला है। मुख्य क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर हाई कोर्ट में 14 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी।
Q2: क्या हेमंत सोरेन को PMLA कोर्ट में खुद पेश होना पड़ेगा?
उत्तर: PMLA कोर्ट की अगली प्रक्रिया और आदेशानुसार आरोपी को अदालती कार्यवाही का हिस्सा बनना पड़ता है।
Q3: CrPC की धारा 197 क्या है जिस पर सोरेन पक्ष ने राहत मांगी थी?
उत्तर: यह धारा किसी लोक सेवक/सरकारी अधिकारी पर पद पर रहते हुए किए गए कार्यों के लिए बिना पूर्व सरकारी अनुमति (Sanction) के मुकदमा चलाने से सुरक्षा देती है। हाई कोर्ट ने कहा कि जमीन घोटाले का आरोप आधिकारिक कर्तव्य में नहीं आता।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों और उपलब्ध न्यायिक आदेशों के विश्लेषण पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह नहीं है। अदालत में चल रहे मामलों के निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेशों के अधीन हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।