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मुहर्रम के जुलूस के दौरान लगे नारे, ‘हिंदुस्तान में रहना है, या हुसैन कहना है’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. यूपी के अमेठी में मुहर्रम के जुलूस में युवकों द्वारा लगाए गए भड़काऊ नारे से हड़कंप मचा है.  जुलूस के दौरान युवकों ने “हिंदुस्तान में रहना है, या हुसैन कहना है” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो वायरल होने के बाद मुसाफिरखाना कोतवाली पुलिस जांच में जुटी है. पुलिस कुछ युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. वहीं अमेठी पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने कहा मुसाफिरखाना कोतवाली में संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है. रविवार देर शाम मुसाफिरखाना कस्बे में निकला था मोहर्रम का जुलूस.

अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के कस्बे में देर शाम मोहर्रम जुलूस के दौरान कुछ युवकों द्वारा विवादित नारा लगाने का मामला सामने आया. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो चर्चा विषय बन गया. वायरल वीडियो मुहर्रम के जुलूस का बताया जा रहा है, जिसमें कुछ युवक हिंदुस्तान में रहना है, या हुसैन कहना है, का नारा लगाते हुए सुने जा रहे हैं. वीडियो मुसाफिरखाना का बताया जा रहा है. अमेठी पुलिस ने इस मामले में जांच पड़ताल व कार्रवाई शुरू कर दी है.

कुछ युवकों को हिरासत में लिया गया

बताया जा रहा है कि मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में रविवार देर शाम मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था, जिसमें युवकों के झुंड में शामिल लोग नारे लगाने शुरू कर दिए. दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो मुसाफिरखाना कोतवाली के पास का है. हालांकि न्यूज़18 इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता. वहीं पूरे मामले पर अमेठी पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने कहा वायरल वीडियो संज्ञान में आया है वीडियो में दिख रहे युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है. संबंधित के खिलाफ मुसाफिरखाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है. पूरे मामले पर विधिक कार्रवाई की जा रही है.

संत समाज भी नाराज

वहीं वीडियो वायरल होने के बाद अमेठी का संत समाज भी नाराज हो रहा है. सागरा आश्रम पीठाधीश्वर मौनी महाराज ने वायरल वीडियो पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री व पुलिस अधीक्षक से मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई है और कहां है कि ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो जिससे भविष्य में इस तरह का माहौल न बन पाए.

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साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।