शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 01:29:25 AM

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंच पर चढ़ा शख्स, सुरक्षा में चूक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सुरक्षा में रविवार (15 सितंबर, 2024) को तब बड़ी चूक हो गई, जब कार्यक्रम के बीच भरे मंच पर दौड़ते हुए एक शख्स चढ़ आया. अनजान व्यक्ति की इस हरकत से वहां पहले तो कोई कुछ समझ नहीं पाया मगर जब सुरक्षाकर्मियों ने रोका तो सब लोग कुछ पल के लिए हैरान रह गए. हालांकि, अच्छी बात यह रही कि वह सीएम तक नहीं पहुंच पाया और उसे पहले ही पकड़ लिया गया. फिलहाल उस व्यक्ति के बारे में अधिक जानकारी नहीं पता चली है और न ही यह साफ हुआ है कि वहां वहां क्या किस इरादे से गया था. सुरक्षाकर्मियों ने संदिग्ध युवक को पकड़कर पुलिस कौ सौंप दिया. पुलिस युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

जानें क्या है पूरा मामला

दरअसल, एक सीएम सिद्धारमैया एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद थे. तभी एक युवक तेजी से दर्शकदीर्घा से उठकर मंच पर तरफ भागा. हालांकि सीएम की सुरक्षा में मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उसे सीएम की कुर्सी तक पहुंचने से पहले ही दबोच लिया. अभी तक युवक की इस हरकत की वजह का पता नहीं चला है. युवक की पहचान भी उजागर नहीं की गई है. फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है.

लोकसभा चुनाव में भी सुरक्षा में चूक का मामला आया था सामने

बता दें कि ससे पहले लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था. तब चुनाव प्रचार के दौरान सीएम को एक कार्यकर्ता ने माला पहनाया, जिसके कमर में पिस्टल लटकी हुई थी. यह मामला बेंगलुरु दक्षिण में चुनाव प्रचार रैली के दौरान हुआ था. इस दौरान चुनाव प्रचार रैली के दौरान  रियाज़ नाम के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री को माला पहनाई थी और तब उसके कमर के बेल्ट में पिस्टल लगी हुई थी.

साभार : एबीपी न्यूज़

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।