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विधेयक रोकने के लिए ताइवान की संसद में सांसदों के बीच चले लात-घूंसे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ताइपे. संसद में सांसदों को बहस करते हुए आपने जरूर देखा होगा। कई बार संसद में बहस के दौरान सांसदों के बीच कहासुनी और तीखी बहस होती है। कई बार मारपीट की स्थिति पैदा हो जाती है। ताइवान की संसद का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक सांसद विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए कागजात लेकर ही भाग गया।

ताइवान की संसद में बवाल

मामला 17 मई का है। ताइवान की संसद का एक सदस्य एक विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए विधेयक की कॉपी लेकर भाग गया। बताया गया कि इस घटना से पहले ताइवान के सांसदों ने संसद में एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की, हाथापाई और मारपीट भी की। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि विधेयक को लेकर वोट डाले जाने से पहले ही कई सदस्य चिल्लाने लगे और हंगामा करने लगे। इतना ही नहीं, एक-दूसरे पर धक्का-मुक्की करने लगे। सदन के सदस्य मेजों पर चढ़ गए और सहकर्मियों को फर्श पर गिरा दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर लोगों के तरह-तरह के कमेंट्स आ रहे हैं। एक ने लिखा कि क्या ये वाकई संसद है? देखने को ऐसा लग रहा है कि किसी बाजार में मारपीट हो रही है और चोर चोरी करके भाग रहे हैं। एक ने लिखा कि यह शख्स इतनी तेजी से भागा है कि ओलंपिक में भी सबको पीछे छोड़ दे। एक अन्य ने लिखा कि सांसदों का व्यवहार लगातार गिरता जा रहा है। एक अन्य ने लिखा कि ऐसा लगता है कि ये लोग “नाइजीरियाई राजनेताओं” से सीख रहे हैं। ये शख्स जरूर नाइजीरिया गया होगा या नाइजीरिया की राजनीति को ध्यान से देख रहा होगा। एक शख्स ने लिखा कि एक बार भारत की संसद में कागजात फाड़े गए थे, कुछ हद तक मामला मारपीट तक पहुंच चुका था लेकिन गनीमत रही थी कि संसद की गरिमा बचा ली गई थी।

साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।