शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 08:40:34 PM

रानी द्रौपदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
1 Min Read

भारत का एक छोटा सा राज्य धार था। 22 मई 1857 को धार के राजा का देहांत हो गया था। ऐसे में राजा की बड़ी रानी द्रौपदीबाई ने सत्ता संभाल ली। इसका कारण यह था कि राज्य का उत्तराधिकारी आनंदराव बालासाहब नाबालिग था। अंग्रेजों ने अपने ही बनाए नियमों को दरकिनार करते हुए नाबालिग उत्तराधिकारी को मान्यता दे दी। चारों तरफ क्रांति की लहर थी, अंग्रेजों का विचार था कि यदि हम नाबालिग उत्तराधिकारी को मान्यता दे देंगे, तो द्रौपदीबाई, लक्ष्मीबाई की तरह विद्रोह नहीं करेंगी। इसके विपरीत जैसे ही रानी द्रौपदीबाई ने सत्ता संभाली, वैसे ही उन्होंने रामचंद्र बापूजी को अपना दीवान नियुक्त कर दिया। इसके बाद रामचंद्र बापूजी, रानी द्रौपदीबाई और उनके भाई भीमराव भोंसले तीनों ने मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। 22 अक्टूबर 1857 को अंग्रेज अधिकारी कर्नल डूरेंड ने धार का किला घेर लिया, दोनों सेनाओं के बीच युद्ध 30 अक्टूबर तक चला। इसके बाद किले की दीवार में दरार पड़ गई, जिसके कारण रानी द्रौपदी को अपने विश्वासपात्र सैनिकों को साथ लेकर वहां से निकलना पड़ा। अंग्रेज कर्नल ने किला ही ध्वस्त करवा दिया, लेकिन तब भी वो द्रौपदी को नहीं पकड़ पाया।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।