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अखिलेश यादव उ.प्र. विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को 3 सीट देने को राजी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनावों में सीट के बंटवारे पर अभी तक समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच आम सहमति नहीं बन पाई है. दोनों पार्टियों के बीच लगातार खींचतान चल रही है. इस बीच बड़ी खबर सामने आई है कि सपा और कांग्रेस के बीच आम सहमति बनते हुए दिखाई दे रही है. सपा ने कांग्रेस को एक और सीट ऑफर की है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि कांग्रेस सूबे में इंडिया गठबंधन के तहत तीन सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.

यूपी विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस से सपा संपर्क में है. कांग्रेस को गाजियाबाद के बाद फूलपुर विधानसभा सीट भी मिल सकती है. सपा के इस तीसरे सीट के ऑफर के बाद आज कांग्रेस इस मसले पर मंथन करेगी, जिसके बाद वह अपना फैसला लेगी. इससे पहले सपा की ओर से कांग्रेस को दो सीटों का ऑफर दिया गया था, जिसमें गाजियाबाद और खैर शामिल थी, जबकि कांग्रेस लगातार पांच सीटों की मांग करती आ रही है.

कांग्रेस का दावा, यूपी में एकसाथ लड़ेंगे

हालांकि कांग्रेस ने दावा किया है कि उसका सपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का रिजल्ट जो भी रहे लेकिन वह इस उपचुनाव में एकसाथ मैदान में उतरेगी. बीते दिन यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, ‘सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, इंडिया ब्लॉक एकजुट होकर उपचुनाव लड़ेगा.’ दरअसल, समाजवादी पार्टी पहले ही 7 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है, जिसमें करहल, सीसामऊ, फूलपुर, मिल्कीपुर, कटेहरी, मझवान और मीरापुर शामिल है. यूपी में उपचुनाव मिल्कीपुर (अयोध्या) को छोड़कर नौ सीटों पर हो रहे हैं.

महाराष्ट्र में सपा चाहती है 12 सीटें

समाजवादी पार्टी भी कह चुकी है कि कांग्रेस के साथ उसका समझौता आखिरी हो गया. 10 में से कांग्रेस 2 सीटों, खैर (अलीगढ़) और गाजियाबाद पर वह चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी आठ सीटों पर सपा अपने प्रत्याशी उतारेगी. हालांकि अब समाजवादी पार्टी का मन बदला है और उसने कांग्रेस को एक और सीट का ऑफर दे दिया. सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा इस ऑफर का फायदा महाराष्ट्र में उठाना चाहती है. वह इंडिया गठबंधन के तहत महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 12 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में कांग्रेस को संतुष्ट करने के बाद महाराष्ट्र में तवज्जो चाहती है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।