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दिल्ली से गायब हेमंत सोरेन रांची में मिले, की अपने विधायकों के साथ बैठक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रांची. जमीन घोटाले में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार 30 जनवरी की दोपहर रांची पहुंचे। वे सोमवार 29 जनवरी से लापता थे। रांची पहुंचकर उन्होंने सीएम हाउस में सत्ता पक्ष (JMM, कांग्रेस और आरजेडी) के विधायकों के साथ मीटिंग की। कयास लगाए जा रहे हैं कि कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने जाने पर सहमति बन सकती है। इधर, जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि झारखंड के सीएम के साथ क्रिमिनल जैसा व्यवहार किया गया। जब उन्होंने पूछताछ के लिए 31 जनवरी की समय दिया था तो ED उनके आवास पर क्यों गई। उन्होंने कहा कि वे नीतीश और अजीत पवार नहीं हैं।

27 जनवरी को हेमंत सोरेन चार्टर प्लेन से दिल्ली गए थे, कुछ बैठकें कीं थी, उसके बाद से उनकी कोई खबर नहीं थी। 29 जनवरी को सुबह 7 बजे जांच एजेंसी ED उनसे पूछताछ करने दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची, लेकिन सोरेन वहां नहीं मिले। एजेंसी यहां से कुछ जरूरी कागजात, BMW कार और 36 लाख कैश जब्त कर ले गई। जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सीएम अपने निजी काम से दिल्ली गए थे। जब सीएम ने 31 जनवरी का टाइम ईडी को दिया है तो किसके आदेश पर एजेंसी के लोग सीएम दिल्ली के आवास पर पहुंचते हैं। 36 लाख मिलने पर कहा कि क्या उनकी अनुपस्थिति में घर की तलाशी ली जानी चाहिए थी। मैं पूछता हूं कि क्या ये ईडी या बाबूलाल की तरफ से प्लांड नहीं किया गया। सीएम से क्रिमिनल की तरह व्यवहार हो रहा है। हेमंत सोरेन ना अजीत पवार है, ना नीतीश कुमार है। वो वीर शिबू सोरेन के बेटा हैं। हमलोग इसे लेकर जल्द आपराधिक मुकदमा दर्ज कराएंगे।

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की प्रेस कॉन्फ्रेस

मुख्यमंत्री सिर्फ एक व्यक्ति नहीं संस्था है। मुख्य विरोधी दल ने नीचता की प्रकाष्ठा दिखाई। बाबूलाल ने पोस्टर लगाया और 11 हजार का इनाम रख रहे हैं। जो मनोचिकित्सक बाबूलाल की मनोदशा को ठीक कर देगा, उसे जेएमएम 11 लाख देगी।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।