रविवार, सितंबर 20 2026 | 06:41:23 PM

शराब तस्करी के आरोप में बेगूसराय में 3 पुलिसवालों सहित 7 लोग गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

पटना. बिहार में शराबबंदी के बावजूद खुद पुलिस इसकी बिक्री करा रही है। ताजा मामला बेगूसराय से सामने आया है, जहां शराब तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क में बेगूसराय पुलिस के तीन जवान शामिल थे। जिस वजह से तस्करी का नेटवर्क फल फूल रहा था। पुलिस अधिकारियों को जब इसकी गुप्त सूचना मिली तो वे भी हैरान रह गए। इसकी जानकारी डीएसपी बखरी कुंदन कुमार ने दी है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपित टाइगर मोबाइल के जवानों की गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तार किए गए टाइगर मोबाइल के तीनों जवानों से पूछताछ की जा रही है। टाइगर मोबाइल के जवान नियाज आलम, चंदन कुमार और शशिभूषण की निशानदेही पर चार शराब कारोबारियों को भी गिरफ्तार किया गया हैं।

शराब तस्करी में संलिप्त थे पुलिसकर्मी

डीएसपी कुंदन कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना मिली कि बखरी थाना क्षेत्र के सलौना रेलवे स्टेशन के पास एक पिकअप वाहन से शराब मंगाया गया है। जिसकी डिलीवरी वहां होनी है। इसी सूचना के आधार पर बखरी पुलिस एक्टिव हो गई एवं उक्त जगह पर छापेमारी करने के लिए गई। बखरी पुलिस ने पिकअप वाहन के पास टाइगर मोबाइल के तीन जवान को पाया। तीनों जवान शराब माफिया के साथ शामिल नजर आए। मौके पर पुलिस को आता देख शराब माफिया वहां से फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस तो तीनों टाइगर मोबाइल के जवानों के गतिविधि पर शक हुआ।

तीन पुलिसकर्मी और चार शराब माफिया गिरफ्तार

इसी शक के आधार पर टाइगर मोबाइल के जवानों को थाना पर लाकर पूछताछ किया गया। गिरफ्तार शराब कारोबारी के पास से 22 लीटर देसी शराब और 3 लीटर विदेशी शराब व 17,500 नगद एवं 8 मोबाइल बरामद किया गया। टाइगर मोबाइल के जवानों एवं शराब कारोबारी के मोबाइल की जांच की गई तो उसमें इनपुट मिला कि टाइगर मोबाइल के जवानों की मिली भगत से शराब की तस्करी हो रही है। इसके बाद तीनों जवानों और चारों कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

शराब माफिया पुलिसकर्मियों को देते थे रुपये

कुंदन ने बताया कि टाइगर मोबाइल के जवानों को निलंबित करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के सूत्रों के अनुसार कारोबारी ने बताया कि शराब की गाड़ी पुलिसकर्मी के संरक्षण में उतरती थी और बेची जाती थी। शराब की दिनभर में चाहे कितनी भी बिक्री हो शाम में फिक्स रुपया और एक बोतल शराब टाइगर मोबाइल के जवान को देना पड़ता है। गुरुवार की देर रात भी टाइगर मोबाइल के इन तीनों जवानों के संरक्षण में एक पिकअप पर लोड 135 कार्टून विदेशी शराब को उतरा एवं बेचा गया गया था।

- Advertisement -

साभार : इंडिया टीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।