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बिहार में अनुदानित मदरसों की ज़मीनी हकीकत खंगालेगी सम्राट सरकार: फर्जीवाड़ा रोकने के लिए 10 दिनों में मांगी रिपोर्ट

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पटना । मंगलवार, 2 जून 2026

बिहार की एनडीए (सम्राट चौधरी) सरकार ने राज्य के शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता लाने और सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य के सभी अराजकीय अनुदानित मदरसों (Non-Government Aided Madrasas) और संस्कृत विद्यालयों की ज़मीनी हकीकत की जांच का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEOs) को इस संबंध में सख्त दिशानिर्देश भेजे हैं।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा दिए जा रहे वेतनानुदान (Salary Grant) और अन्य वित्तीय सहायताओं का उपयोग केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के विकास के लिए ही हो रहा हो।

निष्पक्ष जांच के लिए ब्लॉक स्तर पर त्रिसदस्यीय समिति का गठन

जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभाव-मुक्त बनाने के लिए ब्लॉक (प्रखंड) स्तर पर एक तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया जाएगा। संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) इस समिति की रूपरेखा तैयार करेंगे।

समिति में कौन-कौन शामिल होगा?

  1. अध्यक्ष: संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) या अंचलाधिकारी (CO)।

  2. सदस्य 1: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO)।

  3. सदस्य 2: स्थानीय क्षेत्र के सरकारी हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक (Headmaster)।

लाइव तस्वीरें और कड़े नियम: कैसे होगी जांच?

इस बार की जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा विभाग ने जमीनी हकीकत परखने के लिए कड़े नियम बनाए हैं:

  • स्थलीय निरीक्षण (Physical Verification): समिति के सदस्यों को खुद मदरसे के परिसर में जाकर भौतिक सत्यापन करना होगा।

  • डिजिटल साक्ष्य (Live Photos): पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निरीक्षण के दौरान मदरसे के बुनियादी ढांचे, क्लासरूम और गतिविधियों की लाइव तस्वीरें खींची जाएंगी, जिन्हें रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा।

  • 10 दिनों की समयसीमा: जांच टीम को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अगले 10 दिनों के भीतर संबंधित जिला पदाधिकारी को सौंपनी होगी।

क्या जांचा जाएगा? मदरसों में नामांकित छात्र-छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति, कार्यरत शिक्षकों और कर्मियों की प्रामाणिकता, शैक्षणिक स्तर और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं।

शिक्षा मंत्री का बड़ा एलान: फर्जी संस्थानों पर लगेगा ताला

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिहार में शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,

“जांच रिपोर्ट में जो भी मदरसे या संस्कृत विद्यालय नियमों के खिलाफ और फर्जी पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत बंद कर दिया जाएगा। सरकार पूरी प्रामाणिकता के साथ चलने वाले संस्थानों को बढ़ावा देगी। मदरसा बोर्ड और संस्कृत शिक्षा बोर्ड दोनों की समान रूप से जांच होगी, ताकि किसी भी स्तर पर भेदभाव न हो।”

जांच पर शुरू हुई राज्य में सियासत

सरकार के इस फैसले के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ताओं और कई नेताओं ने इसे एक समुदाय विशेष के शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया है। वहीं, सत्तापक्ष (BJP-NDA) का कहना है कि यह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सरकारी फंड की सही मॉनिटरिंग के लिए उठाया गया एक सुधारात्मक कदम है।

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