पटना । शनिवार, 30 मई 2026
बिहार की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सरकारी आवासों को लेकर तलवारें खिंच गई हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना के ’10 सर्कुलर रोड’ स्थित अपने आधिकारिक बंगले को खाली करने के सरकारी आदेश पर बेहद बागी रुख अपना लिया है। दिल्ली से पटना लौटते ही उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए साफ कह दिया कि वे किसी भी कीमत पर यह बंगला खाली नहीं करेंगी।
राबड़ी देवी ने सूबे के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा तंज कसते हुए कहा:
“मैं किसी कीमत पर यह आवास खाली नहीं करूंगी। सम्राट चौधरी फोर्स बुलवा कर आवास खाली करवाएं। वह अभी नए-नए मुख्यमंत्री बने हैं, इसलिए काफी उत्साह में हैं।”
इस तीखे बयान के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। आइए समझते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की वजह क्या है और सरकारी नियम इस पर क्या कहते हैं।
क्या है 10 सर्कुलर रोड बंगले का विवाद?
यह विवाद तब सामने आया जब बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने एक आदेश जारी कर 10 सर्कुलर रोड वाले बंगले को बिहार सरकार के नए ‘पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री’ नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया।
विभाग के आदेश के अनुसार, इस बंगले को अब ‘उपमुख्यमंत्री’ या विशिष्ट कैबिनेट मंत्रियों के लिए सुरक्षित श्रेणी में डाल दिया गया है। राबड़ी देवी, जो वर्तमान में बिहार विधान परिषद (Legislative Council) में नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) हैं, उन्हें इसके बदले 39, हार्डिंग रोड पर वैकल्पिक सरकारी आवास आवंटित किया गया है।
भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है:
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राबड़ी देवी को पहले ही 39, हार्डिंग रोड वाला बंगला आवंटित किया जा चुका है।
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वे यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें उनके पद के अनुसार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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10 सर्कुलर रोड अब एक मौजूदा मंत्री को आवंटित हो चुका है, इसलिए इस मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
आरजेडी का तर्क: दो दशकों का ‘पावर सेंटर’
आरजेडी खेमे के लिए यह बंगला सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं है। पिछले दो दशकों से यह आवास बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति और लालू-राबड़ी परिवार की पहचान रहा है। पार्टी के नेता इसे विशुद्ध रूप से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ (Political Vendetta) की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
चूंकि पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (जो वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और उन्हें 1, पोलो रोड आवंटित है) भी अपना अधिकांश समय इसी 10 सर्कुलर रोड वाले आवास में बिताते हैं, इसलिए आरजेडी इस परिसर को छोड़ने के मूड में नहीं है।
क्या कहता है सरकारी नियम?
बिहार भवन निर्माण विभाग के नियमों के मुताबिक, राज्य में जब भी मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होता है, तो मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के आवासों का नए सिरे से आवंटन (Re-allotment) किया जाता है। चूंकि अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली है, इसलिए नई कैबिनेट के मंत्रियों को जगह देने के लिए पुरानी सूचियों में बदलाव किया जा रहा है।
आगे की राह और प्रशासनिक चुनौती
राबड़ी देवी द्वारा खुलेआम ‘बल प्रयोग’ करने की चुनौती दिए जाने के बाद अब गेंद पूरी तरह से राज्य प्रशासन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पाले में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन जबरन इस बंगले को खाली कराने की कोशिश करता है, तो आरजेडी इसे “बिहार की पूर्व महिला मुख्यमंत्री के अपमान” का बड़ा मुद्दा बनाकर सड़कों पर उतर सकती है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से सरकार इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश भी कर सकती है, या फिर यह मामला अदालत (High Court) की चौखट तक पहुंच सकता है।
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