गुरुवार, जनवरी 22 2026 | 04:13:47 PM
Breaking News
Home / व्यापार / इंडिगो ने टर्किश एयरलाइंस के साथ समझौता किया समाप्त

इंडिगो ने टर्किश एयरलाइंस के साथ समझौता किया समाप्त

Follow us on:

मुंबई. तुर्की के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारत सरकार ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज को छह महीने तक बढ़ाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. हालांकि, दिल्ली-इस्तांबुल और मुंबई-इस्तांबुल रूट पर फ्लाइटें अचानक बंद ना हो, इसके लिए DGCA ने इंडिगो को तीन महीने की अंतिम मोहलत दी है. यानी इंडिगो को तीन महीने के भीतर टर्किश एयरलाइंस के साथ करार खत्म करना होगा.

सरकर ने तीन महीने की ये आखिरी मोहलत तब दी है जब एक दिन बाद ही मौजूदा लीज एग्रीमेंट की अवधि खत्म हो रही थी. सरकार ने इंडिगो को यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि वह टर्किश एयरलाइंस के साथ अपना डैम्प लीज करार तय समय पर खत्म कर देगी. हाल ही में भारत सरकार ने टर्की की कंपनी  Celebi Airport Services India की सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द की है. इस फैसले के बाद से ही यह अटकलें तेज हो गई थीं कि इंडिगो और टर्किश एयरलाइंस के डैम्प लीज रिन्यूअल को मंजूरी मिलना मुश्किल है.

भारत ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब टर्की ने भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में पाकिस्तान का समर्थन किया है. इसके अलावा टर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई किया जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ सैन्य अभियानों में किया गया. इसी मद्देनजर भारत सरकार टर्की की कंपनियों की देश में मौजूदगी की समीक्षा कर रही है और कई मामलों में सख्त रुख अपना रही है.

इंडिगो को मिली अंतिम मोहलत

फिलहाल इंडिगो, टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज पर दो बोइंग 777-300ER विमान ऑपरेट कर रही है, जिसकी अनुमति 31 मई 2025 तक दी गई थी. इंडिगो ने इसे छह महीने और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकृति नहीं दी. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने तीन महीने की एक बार की अंतिम मोहलत दी है. यानी अब यह लीज 31 अगस्त 2025 तक वैध रहेगी.

DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि इंडिगो ने एक हलफनामा दिया है, जिसमें कहा गया है कि वह इस अवधि के भीतर टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज खत्म कर देगी और भविष्य में इसको बढ़ाने के लिए कोई अनुरोध नहीं करेगी. डैम्प लीज व्यवस्था में एयरक्राफ्ट और पायलट व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी लीज देने वाली कंपनी की होती है, जबकि कैबिन क्रू (केबिन स्टाफ) एयरलाइन खुद देती है.

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

सोना-चांदी में तेजी की आगेकूच जारीः सोना वायदा में 7115 रुपये और चांदी वायदा में 9104 रुपये का ऊछाल

क्रूड ऑयल वायदा 52 रुपये बढ़ाः कमोडिटी वायदाओं में 109544.87 करोड़ रुपये और कमोडिटी ऑप्शंस …