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जहरीली गैस निकलने के कारण रोकी गई चंदौसी में मिली बावड़ी की खुदाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल जिले में चंदौसी की बावड़ी में दूसरे फ्लोर पर आज खोदाई के दौरान बावड़ी के कुछ हिस्से में धुएं जैसी गैस निकलने लगी। खोदाई कर रहे लेबर ने मामले की जानकारी ठेकेदार को दी। इसके बाद ठेकेदार ने उस स्थान की खोदाई पर ब्रेक लगवा दिया। एक्‍सपर्ट्स की टीम के निरीक्षण के बाद उस स्थान पर आगे खोदाई होगी ताकि काम कर रहे मजदूरों के साथ कोई अनहोनी न हो। संभल में रानी की ऐतिहासिक बावड़ी की खोदाई पिछले 13 से हो रही है। यहां दूसरे मंजिल का गेट दिखाई देने पर गैस निकलने की खबरें आईं। जब वहां काम कर रहे मजदूरों को दिक्कत होने लगी तो उस जगह पर बावड़ी के अंदर मजदूरों को जाने से रोक दिया गया। मजदूरों ने ठेकेदार को बताया कि बावड़ी के नीचे से धुंआ जैसा निकल रहा जिसके बाद वहां से मजदूरों को हटाया गया और काम रोक दिया गया था।

दरअसल चंदौसी स्थित लक्ष्मणगंज मोहल्ले में बीते करीब दो सप्‍ताह से रानी की बावड़ी की खोदाई चल रही थी। बुधवार को खोदाई का 13 वां दिना था। भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम यहां लगातार सर्वे कर रही है। करीब 25 फीट तक बावड़ी की खुदाई होने के बाद दूसरी मंजिल का गेट दिखाई देने लगा है। हालांकि ASI की टीम ने बुधवार को जब बावड़ी की दूसरी मंजिल के भीतर जाकर सर्वे किया तो यह जानकारी सामने आई कि बावड़ी की कुछ दीवारें कमजोर है। नीचे ऑक्सीजन की कमी जैसे संकेत मिलते हुए दिखाई दिए। इसके बाद भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने मजदूरों को दूसरी मंजिल के अंदर जाने से रोका दिया है। ठेकेदार मुन्ना सिंह के मुताबिक दूसरे तल के नीचे धुंआ निकलने की जानकारी के बाद फिलहाल वहां का काम रोक दिया गया है। आगे छानबीन के बाद वहां कार्य किया जाएगा।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।