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सपा नेता गुलशन यादव पर इनाम बढ़ाकर एक लाख रुपये किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश के अति करीबी और कुंडा में कुंडी लगाने का दम भरने वाले गुलशन यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. समाजवादी पार्टी के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष गुलशन यादव, जिन पर पहले पचास हज़ार का इनाम था, अब इनाम की राशि दोगुनी कर दी गई है. पुलिस अभिलेखों में फरार चल रहे गुलशन यादव पर एक लाख का इनाम रख दिया है.

यूपी की राजनीति में हमेशा से यादव ब्रदर्स सुर्खियों में रहे हैं, आपको बता दें समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव इस समय जेल में बंद हैं. कई महीनों से जमानत न मिलने के कारण पार्टी संगठन ने उनके बड़े भाई गुलशन यादव को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी. मगर राजनीति की ये जिम्मेदारी गुलशन यादव के आपराधिक इतिहास के आगे हल्की साबित हो रही है.

गुलशन यादव पर एक लाख का इनाम

पुलिस रिकॉर्ड्स में गुलशन यादव पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. आरोपों की लंबी फेहरिस्त है और कई मामलों में वे फरार चल रहे हैं. इसी फरारी को देखते हुए पुलिस ने पहले उन पर 25 हज़ार का इनाम रखा लेकिन जब गिरफ्तारी नहीं हो सकी तो इनाम बढ़ाकर 50 हज़ार कर दिया गया. अब, पुलिस ने इस इनामी राशि को सीधे 1 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है.

राजनीतिक हल्को में चर्चाओं का बाजार गर्म

पुलिस का कहना है कि गुलश न यादव की गिरफ्तारी प्राथमिकता पर है और उन्हें किसी भी हाल में गिरफ्तार किया जाएगा. वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बड़ी हलचल मची हुई है. एक ओर समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह सब राजनीतिक दबाव और साजिश के तहत हो रहा है, तो वहीं भाजपा खेमे का आरोप है कि सपा नेताओं का अपराध से गहरा नाता रहा है.

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गुलशन यादव की गिरफ्तारी के प्रयास तेज

प्रतापगढ़ में सपा नेता गुलशन यादव पर गिरफ्तारी की तलवार और तेज़ हो गई है. पुलिस अब हर संभव कोशिश कर रही है कि फरार चल रहे गुलशन यादव को पकड़ सके. देखना होगा कि राजनीति और अपराध के इस गठजोड़ में आखिर कब तक गुलशन यादव पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।