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नक्सलियों ने झारखंड-ओडिशा के बीच रेलवे ट्रैक उड़ाया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची. झारखंड और ओडिशा की सीमा पर रविवार सुबह नक्सलियों ने बड़ा हमला किया। संदिग्ध माओवादियों ने झारखंड के करमपाड़ा और ओडिशा के रेंजेदा स्टेशन के बीच रेलवे लाइन को निशाना बनाते हुए धमाका किया। इस विस्फोट में ट्रैक का बड़ा हिस्सा पूरी तरह उड़ गया और इस रूट पर ट्रेन सेवाएं तुरंत रोक दी गईं। यह धमाका ऐसे समय हुआ है, जब नक्सली संगठन 28 जुलाई से 3 अगस्त तक ‘शहीद सप्ताह’  मना रहे हैं। इसी दौरान सरंडा जंगल क्षेत्र में उनकी गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही रेड अलर्ट जारी किया था, लेकिन रविवार की सुबह यह धमाका सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन गया। धमाका बिमलागढ़ सेक्शन के अंतर्गत हुआ, जो झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला अहम रेल मार्ग है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ट्रैक के कई मीटर हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है। गनीमत रही कि धमाके के समय कोई ट्रेन इस रूट से नहीं गुजर रही थी, इसलिए जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

मालगाड़ियों के लिए भी अहम रूट

यह इलाका घने सरंडा जंगल के बीच आता है, जो लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है। करमपाड़ा और रेंजेदा दोनों स्टेशन सीमा पर होने के कारण यह एक संवेदनशील इलाका बन जाता है। ये रूट न केवल यात्रियों बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। धमाके के बाद रेलवे ने तुरंत इस रूट पर सभी ट्रेनों की आवाजाही रोक दी। मौके पर ओडिशा पुलिस, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाल लिया।

सर्च ऑपरेशन जारी

घने जंगल में सर्च ऑपरेशन और कॉम्बिंग शुरू कर दी गई है। किसी भी अन्य विस्फोटक की आशंका को देखते हुए बम डिटेक्शन यूनिट को मौके पर बुलाया गया है। फिलहाल पूरा इलाका सील कर दिया गया है। रेलवे इंजीनियरों की टीम ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। विस्तृत जांच और रिपोर्ट तभी सामने आएगी जब सुरक्षा बल इस इलाके को पूरी तरह क्लियर कर देंगे। घटना के बाद झारखंड-ओडिशा बॉर्डर पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। दोनों राज्यों के पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सरंडा जंगल के भीतर गहराई तक ऑपरेशन करने के निर्देश दिए गए हैं।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।