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कुपवाड़ा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 2 आतंकवादी ढेर हुए

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई है। इस दौरान 2 आतंकी मारे गए हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आतंकवाद को लेकर हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया था। सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और आतंकियों को चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में 2 आतंकी मारे गए।

हालही में गिरफ्तार हुए थे 3 आतंकी

हालही में श्रीनगर पुलिस ने देर रात ममता चौक, कोनाखान, डलगेट के पास से 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी गुरुवार देर रात हुई थी। इनकी पहचान शाह मुतैयब (निवासी कुलीपोरा खानयार), कामरान हसन शाह (निवासी कुलीपोरा खानयार) और मोहम्मद नदीम (निवासी मेरठ, वर्तमान में खानयार के कावा मोहल्ला) के रूप में हुई थी और इनके पास से एक देसी कट्टा और नौ जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।

किश्तवाड़ में भी हुई थी मुठभेड़

इसी महीने किश्तवाड़ में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान एक जवान घायल हो गया था। मुठभेड़ तड़के किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके में हुई थी।

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खुफिया रिपोर्ट में हुआ था चौंकाने वाला खुलासा

नवंबर के शुरुआती हफ्ते में ये रिपोर्ट सामने आई थी कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह खासतौर से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM), जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमलों की साजिश रच रहे हैं। भारतीय जवानों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ मिशन के छह महीने बाद आतंकी एक बार फिर सिर उठाने की कोशिश में हैं। हालांकि सुरक्षाबल अलर्ट मोड पर हैं और आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आतंकियों के बीच डर का माहौल है और वह किसी भी तरह का हमला करने से पहले फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं।

साभार : इंडिया टीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।