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संयुक्त अभियान के दौरान मणिपुर से लगभग 55.52 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ और नकदी जब्त की, पांच गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), सीमा शुल्क, 37 बीएन असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की संयुक्‍त टीम ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में तस्करी के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए 5-7 जून को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में “ऑपरेशन व्हाइट वेल ” नामक एक विशेष अभियान चलाया।

इस अभियान के दौरान 54.29 करोड़ रुपये की 7,755.75 ग्राम हेरोइन और 87.57 लाख रुपये की 6,736 ग्राम अफीम जब्त की गई, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय ग्रे ड्रग मार्केट में 35.63 लाख रुपये है। दो बाओफेंग वॉकी-टॉकी और 1 मारुति ईको वैन जब्त की गई और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के अंतर्गत पांच लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

6 जून 2025 की सुबह म्यांमार की सीमा से लगे बेहियांग गांव में एक मारुति ईको वैन पर दो संदिग्धों का सिंगनगाट सब-डिवीजन के थाडौ वेंग में एक घर तक पीछा किया गया। घर की तलाशी लेने पर, हेरोइन से भरे 219 साबुन के डिब्बे और अफीम से भरे आठ पैकेट तथा 18 छोटे टिन के डिब्बे, दो बाओफेंग वॉकी-टॉकी और 7,58,050 रुपये की नकदी बरामद की गई। इस मामले में एक व्यक्ति को उसी घर से और दो अन्य को बुआलकोट चेक गेट पर रोक कर गिरफ्तार किया गया। त्वरित कार्रवाई में बेहियांग गांव में स्थित एक आरोपी के घर की तलाशी ली गई और अफीम से भरे दो पैकेट तथा 28,05,000 रुपये की नकदी बरामद की गई।

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ऑपरेशन के दौरान मिले इनपुट के आधार पर 7 जून 2025 को बीपी 46 के पास ज़ौखोनुआम गांव में दो व्यक्तियों को अवैध हथियार ले जाते हुए रोका गया। तलाशी के दौरान 440 साबुन की पेटियां में पैक की गई हेरोइन बरामद की गईं।

प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि जब्त की गई प्रतिबंधित दवाओं को म्यांमार से भारत-म्यांमार सीमा के झरझरा जंगल के रास्‍ते से चुराचांदपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी करके लाया गया था। चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के  समन्वित प्रयास से ऑपरेशन व्हाइट वेल सफल रहा। एनडीपीएस अधिनियम में अपराधियों के लिए कड़ी सजा और दस साल तक के कठोर कारावास का प्रावधान है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।