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सुप्रीम कोर्ट ने कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत मामले में सीबीआई जांच की याचिका को किया खारिज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मद्देनजर जांच और औषधि सुरक्षा तंत्र में प्रणालीगत सुधार के अनुरोध वाली जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दिया है। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा आपत्ति जताये जाने के बाद खारिज कर दी।

पढ़ते हैं अखबार और दायर कर देते हैं याचिका- सॉलिसिटर मेहता

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता अखबार पढ़ते हैं और याचिका दायर करने के लिए अदालत में आ जाते हैं। पीठ का शुरू में यह विचार था कि नोटिस जारी किया जाना चाहिए, लेकिन बाद में याचिका खारिज कर दी गई।

राज्यों में उचित कानूनी तंत्र

मेहता ने कहा कि वह इस समय किसी राज्य की ओर से पेश नहीं हो रहे हैं, लेकिन तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्य जिस गंभीरता से कार्रवाई कर रहे हैं, उसे कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्यों में उचित कानून प्रवर्तन तंत्र मौजूद हैं।

जब पीठ ने वकील से पूछा- अब तक कितनी याचिकाएं की दायर?

कोर्ट की पीठ ने तिवारी से सवाल किया कि उन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में कितनी जनहित याचिकाएं दायर की हैं और जब बताया गया कि उन्होंने अब तक 8 से 10 ऐसी याचिकाएं दायर की हैं, तो पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘(याचिका) खारिज की जाती है।’

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।