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H2 FY 2026-27 Government Borrowing Calendar: ₹7.96 लाख करोड़ की उधारी योजना का अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
7 Min Read
नई दिल्ली । 
भारत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2) यानी अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच अपने सरकारी बॉन्ड उधारी कैलेंडर (Government Bond Borrowing Calendar) को अंतिम रूप देने की तैयारी में जुट गई है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच प्रस्तावित रणनीतिक चर्चाओं के अनुसार, H2 में लगभग ₹7.96 लाख करोड़ की सकल बाज़ार उधारी (Gross Market Borrowing) की योजना पर विचार किया जा रहा है।
यह उधारी कार्यक्रम भारतीय वित्तीय बाज़ार, बॉन्ड यील्ड, बैंकिंग प्रणाली की तरलता (Liquidity) और आम जनता के लिए ब्याज़ दरों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

₹7.96 लाख करोड़ का आंकड़ा क्यों है महत्वपूर्ण?

वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सरकार ने बजट अनुमानों के तहत ₹17.20 लाख करोड़ की सकल बाज़ार उधारी का लक्ष्य निर्धारित किया था। हालांकि, सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के सफल स्विच (Switches) और ऋण प्रबंधन रणनीतियों के बाद इस आंकड़े को संशोधित कर लगभग ₹16.09 लाख करोड़ कर दिया गया।
पहली छमाही (H1: अप्रैल – सितंबर 2026) के लिए लगभग ₹8.20 लाख करोड़ की उधारी निर्धारित की गई थी। सितंबर के मध्य तक सरकार अपनी निर्धारित उधारी का लगभग ₹7.79 लाख करोड़ पूरा कर चुकी थी। सितंबर के अंत में प्रस्तावित अंतिम H1 नीलामी (Auction) के पूरा होने के बाद, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के दौरान लगभग ₹7.96 लाख करोड़ की उधारी शेष रहने का अनुमान है।

25 सितंबर को हो सकता है अहम फैसला

सरकारी स्रोतों के अनुसार, केंद्र सरकार और RBI के अधिकारियों के बीच 25 सितंबर 2026 के आसपास H2 उधारी कैलेंडर को अंतिम रूप देने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक होने की संभावना है।
इस बैठक के तुरंत बाद अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक आयोजित की जाने वाली सरकारी बॉन्ड नीलामियों का विस्तृत शेड्यूल जारी किया जा सकता है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ₹7.96 लाख करोड़ की राशि में अंतिम बाज़ार स्थितियों, परिपक्वता मिश्रण (Maturity Mix) और नीलामी की समय-सारणी के आधार पर मामूली बदलाव संभव है।

Maturity Mix: किस अवधि के बॉन्ड जारी होंगे?

H2 उधारी योजना में केवल कुल राशि ही मायने नहीं रखती, बल्कि सरकार किस परिपक्वता (Tenor) के कितने बॉन्ड जारी करती है, यह डेट मार्केट (Debt Market) के लिए सबसे संवेदनशील बिंदु होता है।
  • Short-to-Medium Term (3-Year & 5-Year): बाज़ार में 3-वर्षीय और 5-वर्षीय प्रतिभूतियों की आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा हो रही है ताकि अल्पकालिक दरों को संतुलित रखा जा सके।
  • Benchmark 10-Year Bonds: 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड संस्थागत निवेशकों और बेंचमार्क दरों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
  • Ultra-Long Term (30-Year & 50-Year): बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों की दीर्घकालिक मांग को पूरा करने के लिए लंबी अवधि के बॉन्ड जारी किए जाएंगे।
सरकार को अपनी उधारी लागत (Borrowing Cost), निवेशकों की मांग और बॉन्ड-मार्केट लिक्विडिटी के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा।

RBI की Liquidity Operations का असर

H2 उधारी कैलेंडर के लागू होने के समय RBI की ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) और तरलता प्रबंधन नीतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यदि RBI खुले बाज़ार में प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली में मौजूद नकदी और विभिन्न परिपक्वता वाले बॉन्ड की मांग में सीधा बदलाव आता है। यही कारण है कि वित्तीय बाज़ार सरकार के उधारी शेड्यूल और RBI के लिक्विडिटी ऑपरेशन्स को एक साथ जोड़कर देखता है।

आम निवेशकों और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

  1. Government Bond Yields: आपूर्ति और मांग का संतुलन यह तय करेगा कि बॉन्ड यील्ड स्थिर रहेगी या बढ़ेगी।
  2. Banking System Liquidity: अत्यधिक उधारी से बैंकों की तरलता पर दबाव पड़ सकता है, जिससे जमा दरों (Fixed Deposit Rates) में बदलाव आ सकता है।
  3. Corporate Borrowing Cost: सरकारी बॉन्ड की यील्ड कॉर्पोरेट ऋणों के लिए बेंचमार्क होती है। यदि सरकारी उधारी महंगी होती है, तो कंपनियों के लिए लोन लेना भी महंगा हो जाएगा।
  4. Interest Rates: बाज़ार में तरलता की स्थिति अंततः होम लोन, ऑटो लोन और कमर्शियल लोन की ब्याज़ दरों को प्रभावित कर सकती है।

सरकार के सामने मुख्य चुनौतियाँ

सरकार के लिए केवल ₹7.96 लाख करोड़ जुटाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि नीलामी को इस तरह विभाजित करना है कि किसी भी खास अवधि (Maturity Bucket) में ओवर-सप्लाई न हो। यदि किसी एक मैच्योरिटी में अत्यधिक बॉन्ड जारी किए जाते हैं, तो उस अवधि की यील्ड पर दबाव आ सकता है।

FAQ

प्रश्न 1: H2 FY 2026-27 के लिए सरकार की कुल अनुमानित उधारी कितनी है?
उत्तर: दूसरी छमाही (H2) के लिए सरकार की संभावित सकल बाज़ार उधारी लगभग ₹7.96 लाख करोड़ अनुमानित है।
प्रश्न 2: 25 सितंबर 2026 की बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इस दिन वित्त मंत्रालय और RBI की बैठक में उधारी की सटीक राशि, नीलामी तिथियां और Maturity Mix को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
प्रश्न 3: सरकारी उधारी का आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: सरकारी उधारी का सीधा असर देश की ब्याज़ दरों, बैंक लिक्विडिटी और कॉर्पोरेट लोन की लागत पर पड़ता है।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह (Financial or Investment Advice) न माना जाए। बॉन्ड बाज़ार या वित्तीय साधनों में निवेश करने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।