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असम-मेघालय सीमा पर धान की कटाई को लेकर झड़प में एक की मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गुवाहाटी. मेघालय की सीमा से लगे असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में गुरुवार को धान की कटाई को लेकर दो गुटों के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। धान की कटाई को लेकर सीमा के दोनों ओर एक सप्ताह से तनाव है। दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि जमीन उनकी है। पुलिस ने बताया कि झड़प उस वक्त हुई जब मेघालय के लोगों के समूह ने कथित तौर पर धान की कटाई शुरू कर दी, जिसका हमरेन पुलिस थाने के अंतर्गत तपत के ग्रामीणों ने विरोध किया। दोपहर में मेघालय के लापांगप गांव और असम के तपत गांव के निवासियों के बीच कई बार झड़पें हुईं।

झड़प में कार्बी समुदाय के एक व्यक्ति की मौत

मेघालय के पुलिस अधिकारी ने बताया, झड़प में कार्बी समुदाय के एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान असम के तपत गांव निवासी ओरिवेल तिमुंग के रूप में हुई है। झड़प में कई लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

लापांगप गांव में रात्रि कर्फ्यू लगा

इस बीच, मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसांग ने कहा कि मेघालय सरकार ने गुरुवार शाम पश्चिमी जयंतिया हिल्स के लापांगप गांव में रात्रि कर्फ्यू लगा दिया है। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मेघालय और असम के जिला प्रशासन शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निकट संपर्क में हैं।

लापांगप के निवासियों पर हमला

उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि लापांगप के निवासियों पर हमला तब हुआ जब उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने खेतों से धान की कटाई करने की अनुमति दी गई थी। गौरतलब है कि असम और मेघालय के बीच 884.9 किलोमीटर लंबे अंतर-राज्यीय सीमा पर 12 क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। लापांगप उन छह शेष विवादित क्षेत्रों में से एक है जिनका समाधान अभी बाकी है। दोनों राज्य सरकारों ने पहले 12 क्षेत्रों में से छह क्षेत्रों का समाधान किया था, जिसमें मार्च 2022 में नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।