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न्यायाधीशों के खिलाफ आरोपों के बढ़ते चलन पर सीजेआई ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) बी.आर. गवई ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जजों के किसी पार्टी के फेवर में आर्डर पास न करने की स्थिति में उसके खिलाफ गलत आरोप लगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

23 नवंबर को रिटायर होने वाले सीजेआई गवई आज एन. पेड्डी राजू केस में कोर्ट की अवमानना पर सुनवाई कर रहे थे। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने राजू को तेलंगाना हाई कोर्ट की जज जस्टिस मौशुमी भट्टाचार्य के खिलाफ गलत टिप्पणी करने के लिए फटकार लगाई।

जजों पर गलत आरोप लगाने के मामले बढ़े

सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े कहा कि तेलंगाना हाईकोर्ट के जज द्वारा राजू की माफी स्वीकार कर ली गई है, जिसके बाद कोर्ट ने केस बंद कर दिया। हालांकि चीफ जस्टिस ने साफ कर दिया कि वह इससे खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।”

चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, “इस कोर्ट ने 1954 में ही यह कहा था कि वकील कोर्ट के ऑफिसर होने के नाते कोर्ट के प्रति अपनी ड्यूटी निभाते हैं। कानून की शान सजा देने में नहीं, बल्कि माफी मांगने पर माफ करने में है। चूंकि राजू ने हाईकोर्ट के जिस जज के खिलाफ आरोप लगाए गए थे उन्होंने उसकी माफी स्वीकार कर ली है, इसलिए हम आगे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। हम यह जरूर कहेंगे कि कोर्ट के ऑफिसर होने के नाते वकीलों को किसी भी जजों के खिलाफ आरोप लगाने वाले प्लीडिंग्स पर साइन करने से पहले बचना चाहिए।”

वकीलों को सावधानी बरतने की सलाह

जुलाई में टॉप कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उसके वकीलों को तेलंगाना हाईकोर्ट के जज के खिलाफ अपनी याचिका में गलत आरोप लगाने के लिए अवमानना नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए याचिका वापस लेने की इजाजत देने से इनकार कर दिया और कहा, “हम किसी भी याचिकाकर्ता को किसी जज के खिलाफ ऐसे आरोप लगाने की इजाजत नहीं दे सकते।’

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़ा है मामला

इस याचिका में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को SC/ST एक्ट के तहत एक मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली थी। याचिकाकर्ता ने बाद में तेलंगाना के जज पर पक्षपात और गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए ट्रांसफर की अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

साभार : दैनिक जागरण

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