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अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में की 0.25 पॉइंट की कटौती

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वाशिंगटन. अमेरिकी फेड रिजर्व ने लगातार तीसरी बार अपनी प्रमुख ब्याज दर में 0.25 पॉइंट की कटौती की है, लेकिन साथ में इस बात का भी संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरेंअपरिवर्तित रह सकती हैं.

फेड रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फेड आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था की सेहत का मूल्यांकन करते हुए आगे दरों में कोई कटौती नहीं करेगा. इसी दरमियान फेड अधिकारियों ने भी संकेत दिया कि उन्हें अगले साल दरों में सिर्फ एक बार कमी किए जाने की उम्मीद है. बुधवार को फेड की नीति निर्धारण समिति Federal Open Market Committee (FOMC) ने ओवरनाइट लेंडिंग रेट में 0.25 अंकों की कटौती की है. इसी फैसले के साथ ब्याज दर 3.5 परसेंट से घटकर अब 3.75 परसेंट के दायरे में आ गई है, जो लगभग तीन सालों में सबसे कम है.

ट्रंप कर सकते हैं आलोचना

दो दिनों तक चली लंबी मीटिंग के बाद जेरोम पॉवेल ने संकेत देते हुए कहा कि फेड आने वाले महीनों में ब्याज दरों में तब तक कटौती करने से बच सकता है, जब तक कि अर्थव्यवस्था की सेहत का मूल्यांकन नहीं कर लिया जाता. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हो सकता है कि फेड के इस फैसले की आलोचना करे क्योंकि वह ब्याज दरों में और ज्यादा कटौती की उम्मीद लगा रहे थे. फेड रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बाजार को लंबे समय से थी, लेकिन चूंकि कटौती तो हुई, लेकिन फेड का रूख सख्त बना रहा इसलिए इसे ‘हॉकिश कट’ कहा जा रहा है.

फेड के अंदर आपसी मतभेद

पॉवेल ने कहा कि आने वाले समय में फेड अधिकारी अर्थव्यवस्था की चाल पर फोकस रखेंगे. इस दौरान यह देखा जाएगा कि अर्थव्यवस्था का कितना विकास हो रहा है. चेयरमैन ने यह भी कहा कि फेड की प्रमुख ब्याज दर ऐसे स्तर के करीब है, जो न तो अर्थव्यवस्था को प्रतिबंधित करती है और न ही उसे प्रोत्साहित करती है.

इस फैसले की सबसे खास बात यह रही कि तीन फेड अधिकारियों ने इस फैसले के खिलाफ वोटिंग की, जो बीते लगभग छह सालों में सबसे ज्यादा है. आमतौर पर पर फेड सदस्य आपसी सहमति से काम करते हैं. दो अधिकारियों ने दरों में कोई बदलाव न किए जाने के लिए वोटिंग की, जबकि फेड गवर्नर स्टीफन मिरान, जिन्हें ट्रंप ने सितंबर में नियुक्त किया था, ने आधे पॉइंट की कटौती के लिए वोट दिया. इससे फेड के अंदर बढ़ते मतभेद की झलक साफ देखने को मिलती है.

भारतीय शेयर बाजार पर क्या रहेगा असर?

फेड रिजर्व के दर में कटौती का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है. इससे रेट सेंसिटिव स्टॉक्स को बढ़ावा मिल सकता है. इसका असर आईटी कंपनियों के शेयरों, FMCG, तेल कंपनियों और फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दिख सकता है.

ब्याज दर में कटौती, लेकिन फेड रिजर्व का यह सख्त रूख रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) के फ्लो को प्रभावित कर सकते हैं. अगर अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो विदेशी निवेशकों का रूझान भारतीय शेयर बाजारों से कम हो सकता है. इससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का क्रम बना रहता है.

हालांकि, भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ, काबू में महंगाई इस दबाव को कुछ हद तक कंट्रोल कर सकने में मददगार साबित हो सकते हैं. यह RBI के लिए भी कटौती को लेकर जल्दबाजी न करने का संकेत है ताकि वह वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौद्रिक नीति में सतर्कता का रूख बना रखें.

साभार : एबीपी न्यूज

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