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चंद्र ग्रहण 2026: फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन का दुर्लभ महासंयोग, जानें सूतक काल, समय और अपनी राशि पर प्रभाव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

नई दिल्ली । अपडेटेड : गुरुवार, 9 जुलाई 2026

वर्ष 2026 का मार्च महीना आध्यात्मिक, धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत अनोखा होने जा रहा है। इस वर्ष 3 मार्च 2026 को साल का पहला खग्रास (पूर्ण) चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। सबसे विशेष बात यह है कि इसी दिन फाल्गुन पूर्णिमा भी है और सनातन धर्म का प्रमुख पर्व होलिका दहन भी मनाया जाएगा।

ज्योतिषविदों के अनुसार, ऐसा दुर्लभ संयोग कई दशकों में एक बार बनता है जब ग्रहण की छाया और पर्व का उल्लास एक साथ हो। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा, जिसका व्यापक प्रभाव न केवल प्रकृति पर, बल्कि सभी 12 राशियों के जातकों पर भी पड़ेगा।

⏰ चंद्र ग्रहण 2026: समय और सूतक काल की सटीक गणना

भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, ग्रहण की अवधि दोपहर से लेकर शाम तक रहेगी। चूँकि यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल बेहद प्रभावी माना जाएगा।

  • ग्रहण का आरंभ (स्पर्श): दोपहर 02:14 बजे

  • ग्रहण का मध्य: शाम 04:30 बजे

  • ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष): शाम 06:47 बजे

  • सूतक काल का समय: चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले, यानी सुबह 05:14 बजे से ही सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।

ध्यान दें: सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होंगे। इस समय में केवल मानसिक जाप और ध्यान का विधान है।

? होलिका दहन और ग्रहण का टकराव: इस बार क्या करें?

इस वर्ष होलिका दहन और चंद्र ग्रहण एक ही दिन होने के कारण ‘भद्रा’ और ‘सूतक’ का विचार करना अनिवार्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल में अग्नि प्रज्वलित करना शुभ नहीं माना जाता।

शुभ मुहूर्त और सावधानी:

विद्वानों का मत है कि होलिका दहन ग्रहण के मोक्ष (शाम 06:47 बजे) के बाद, शुद्धिकरण और स्नान के पश्चात ही किया जाना चाहिए। प्रदोष काल में ग्रहण की समाप्ति के बाद होलिका पूजन करना समाज और राष्ट्र के लिए कल्याणकारी रहेगा।

? 3 मार्च 2026 का विस्तृत राशिफल (सभी 12 राशियाँ)

यह ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, जिसके स्वामी सूर्य हैं। आइए जानते हैं इसका आपकी राशि पर क्या असर होगा:

राशिप्रभावविशेष ज्योतिषीय सलाह
मेष (Aries)सकारात्मकव्यापार में नए अनुबंध मिल सकते हैं। आय के स्रोत बढ़ेंगे।
वृषभ (Taurus)व्यस्तताकाम की अधिकता रहेगी। वाणी पर संयम रखें, विवादों से बचें।
मिथुन (Gemini)मान-प्रतिष्ठासमाज में सम्मान बढ़ेगा, लेकिन मानसिक तनाव भी रह सकता है।
कर्क (Cancer)भावनात्मकचंद्रमा आपकी राशि का स्वामी है, इसलिए भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
सिंह (Leo)विशेष सावधानीग्रहण आपकी राशि में है। चोट-चपेट से बचें और अहंकार का त्याग करें।
कन्या (Virgo)व्ययबाहरी संपर्कों से लाभ होगा लेकिन फिजूलखर्ची बढ़ सकती है।
तुला (Libra)पारिवारिकपुराने विवाद सुलझेंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ के योग हैं।
वृश्चिक (Scorpio)सतर्कतागुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। निवेश करने से पहले सलाह लें।
धनु (Sagittarius)अनुकूलभाग्य का साथ मिलेगा। अटके हुए काम पूरे होंगे।
मकर (Capricorn)मिश्रितपारिवारिक कलह से बचें। धैर्य से काम लेना लाभदायक होगा।
कुंभ (Aquarius)साझेदारीवैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप में अनबन संभव है। शांत रहें।
मीन (Pisces)स्वास्थ्यसेहत को लेकर लापरवाही न बरतें। योग और प्राणायाम करें।

?️ ग्रहण के दौरान और बाद में क्या करें? (उपाय)

खगोलीय ऊर्जा के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं:

  1. गर्भवती महिलाएं: ग्रहण के दौरान बाहर न निकलें और नुकीली वस्तुओं (कैंची, सुई, चाकू) का प्रयोग न करें।

  2. तुलसी का प्रयोग: सूतक काल शुरू होने से पहले ही (सुबह 05:14 से पहले) खाने-पीने की वस्तुओं (दूध, दही, पानी) में तुलसी के पत्ते या ‘कुश’ डाल दें।

  3. स्नान और शुद्धि: ग्रहण मोक्ष के बाद पवित्र नदियों या घर में ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान अवश्य करें।

  4. दान का महत्व: ग्रहण समाप्त होने के बाद सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध और चांदी का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

?‍♂️ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब है?

Ans. वर्ष 2026 का पहला खग्रास (पूर्ण) चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है।

Q2. क्या सूतक काल में होलिका दहन किया जा सकता है?

Ans. नहीं, सूतक काल में अग्नि प्रज्वलित करना शुभ नहीं माना जाता। होलिका दहन ग्रहण की समाप्ति (शाम 06:47) और स्नान-शुद्धि के बाद ही किया जाना चाहिए।

Q3. चंद्र ग्रहण 2026 का सूतक काल कब शुरू होगा?

Ans. इस ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च 2026 की सुबह 05:14 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।

Q4. यह चंद्र ग्रहण किस राशि में लग रहा है?

Ans. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है।

Disclaimer (अस्वीकरण): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। यह केवल पाठकों की रुचि और सूचना के लिए दी गई है। किसी भी उपाय या मुहूर्त को अपनाने से पहले अपने स्थानीय प्रमाणित ज्योतिषाचार्य या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।