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कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की याचिका को किया खारिज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लालू-राबड़ी ने दिन-प्रतिदिन चल रही सुनवाई पर आपत्ति जताई थी। याचिका में लालू यादव और राबड़ी देवी ने दैनिक सुनवाई को स्थगित करने या राहत देने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उनकी मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य, व्यावहारिक या न्यायोचित नहीं है।

कोर्ट का आदेश

अदालत ने कहा कि देश की संवैधानिक अदालतों ने पहले ही निचली अदालतों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जाए, अनावश्यक स्थगन से बचा जाए। अदालत की मानें तो ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई न्याय व्यवस्था और जनहित, दोनों के लिए आवश्यक है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने पिछले महीने ही आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। सीबीआई के अनुसार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव के अलावा राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, आईआरसीटीसी अधिकारियों, कोचर ब्रदर्स समेत कुल 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे।

जांच एजेंसी क्या कह रही?

जांच एजेंसी के अनुसार, लालू यादव पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आईआरसीटीसी के कई अधिकारियों की मिलीभगत से कोचर ब्रदर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसके एवज में पटना स्थित एक कीमती भूमि को कोचर ब्रदर्स ने एक ऐसी कंपनी को बेच दिया जो लालू प्रसाद यादव के करीबी और राजद के राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी थी। यह जमीन मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (डीएमसीपीएल) के नाम से खरीदी गई थी, जिसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी के नाम से परिवर्तित कर दिया गया। यह कंपनी लालू परिवार के हित में संचालित की जा रही थी और अंततः इस संपत्ति का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादवके हाथों में चला गया।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।