रविवार, सितंबर 20 2026 | 02:34:07 PM

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2026 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्‍डलीय समिति (सीसीईए) ने 2026 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। किसानों को लाभकारी कीमतें देने हेतु, सरकार ने 2018-19 के केन्द्रीय  बजट में घोषणा की थी कि सभी अनिवार्य फसलों का एमएसपी पूरे भारत में उत्पादन की औसत लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर तय किया जाएगा। वर्ष 2026 सीजन के लिए मिलिंग खोपरा के उचित औसत गुणवत्ता (फेयर एवरेज क्वालिटी) का एमएसपी 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल खोपरा का एमएसपी 12,500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

वर्ष 2026 सीजन के लिए एमएसपी पिछले सीजन की तुलना में मिलिंग खोपरा के लिए 445 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल खोपरा के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। सरकार ने विपणन सीजन 2014 के लिए मिलिंग खोपरा और बॉल खोपरा का एमएसपी क्रमशः 5,250 रुपये प्रति क्विंटल और 5,500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर विपणन सीजन 2026 के लिए क्रमशः 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और 12,500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जिसमें क्रमशः 129 प्रतिशत और 127 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी न सिर्फ नारियल उगाने वालों को बेहतर मुनाफा दिलाएगा, बल्कि किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल के उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए खोपरा का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।

नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (एनसीसीएफ) मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खोपरा की खरीद के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) के तौर पर काम करते रहेंगे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।