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हमास ने युद्धविराम समझौते के अंतर्गत सौंपा नेपाली हिंदू छात्र का शव

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काठमांडू. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल-हमासके बीच शांति कराने में कामयाब हो गए हैं. गाजा और इजरायल दोनों ही दो साल तक चले युद्ध में लोगों की मौतों से दुखी हैं. लेकिन साथ ही इस बात को लेकर खुश भी हैं कि यह युद्ध रुक गया है. इस बीच गाजा से एक बुरी खबर नेपाल के लिए आई है. हमास की कैद में नेपाल के छात्र बिपिन जोशी की मौत हो गई, जिसका शव इजरायल को सौंपा गया है. यह वही छात्र था, जिसे 7 अक्तूबर 2023 के हमले में हमास आतंकियों ने अगवा किया था. नेपाल के राजदूत धन प्रसाद पंडित ने नेपाली मीडिया रिपब्लिका को पुष्टि करते हुए कहा, ‘बिपिन जोशी का शव हमास ने इज़रायली अधिकारियों को सौंप दिया है और उसे तेल अवीव लाया जा रहा है.’

इजरायली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने भी बताया कि ‘हमास ने चार बंधकों के शव लौटाए हैं, जिनमें बिपिन जोशी भी शामिल हैं.’ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि DNA टेस्ट के बाद अवशेषों को नेपाल भेजा जाएगा. हालांकि अंतिम संस्कार इजरायल में नेपाली दूतावास के सहयोग से किया जाएगा. नेपाल के एक छोटे कस्बे से निकलकर बिपिन सितंबर 2023 में 16 अन्य छात्रों के साथकिब्बुट्ज़ अलूमिम पहुंचे थे. वह जिस कार्यक्रम में पहुंचे थे वह कृषि प्रशिक्षण और काम का अवसर देने के लिए था. लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनकी जिंदगी बदल गई.

कई जिंदगियां बचाई

7 अक्तूबर 2023 की सुबह जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो अलार्म बज उठे. छात्र बंकर में छिप गए, लेकिन तभी हमास आतंकियों ने दो ग्रेनेड फेंके. एक ग्रेनड फटा तो कई छात्र घायल हो गए, लेकिन बिपिन ने बहादुरी से दूसरा ग्रेनेड उठाकर बाहर फेंका, जिससे कई लोगों की जान बच गई. कुछ ही देर बाद उन्हें हमास के आतंकियों ने पकड़ लिया और गाजा के शिफा अस्पताल में ले जाया गया. इजरायली सेना की ओर से जारी वीडियो में जोशी को खींचकर ले जाते हुए देखा गया था और वही उनकी आखिरी झलक थी.

परिवार ने नहीं छोड़ी थी उम्मीद

जोशी के परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी. उनकी मां और बहन ने इजरायल और अमेरिका तक जाकर मदद की गुहार लगाई. वे चाहते थे कि उनका बेटा सुरक्षित लौट आए. लेकिन दो साल बाद जब गाजा शांति समझौते की घोषणा हुई, उसी समय उनका शव लौटना पूरे नेपाल और इजरायल दोनों के लिए भावनात्मक क्षण बन गया.

साभार : न्यूज18 

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