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तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर ब्रिटेन के एफ-35 लड़ाकू विमान की हुई आपातकालीन लैंडिंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. ब्रिटिश लड़ाकू विमान F-35 की तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है. बताया जा रहा है कि खराब मौसम के कारण इस लड़ाकू विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है. यह जेट विमान ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स विमान वाहक समूह का हिस्सा है, जो वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तैनात है और जिसने हाल ही में भारतीय नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास किया था.

5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर यू.के. के एच.एम.एस. प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है, जो वर्तमान में इंडो-पैसिफिक में काम कर रहा है और जिसने हाल ही में भारतीय नौसेना के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास पूरा किया है. सैन्य विमानन विशेषज्ञ इस घटना को असामान्य बताते हैं, लेकिन अभूतपूर्व नहीं. F-35B वैरिएंट को विशेष रूप से शॉर्ट टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग (STOVL) के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह कैटापुल्ट सिस्टम के बिना विमान वाहक से संचालित हो सकता है.यह स्पष्ट नहीं है कि विमान प्रिंस ऑफ वेल्स पर वापस क्यों नहीं आ पाया, हालांकि शुरुआती संकेत बताते हैं कि वाहक के आसपास खराब मौसम की स्थिति ने सुरक्षित लैंडिंग को रोका हो सकता है.

यू.एस. रक्षा ठेकेदार लॉकहीड मार्टिन द्वारा संचालित F-35 कार्यक्रम को आज सेवा में सबसे उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमान प्लेटफार्मों में से एक माना जाता है.विमान की स्टील्थ क्षमताएं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और डेटा-शेयरिंग बुनियादी ढांचा यू.एस., यू.के., इज़राइल और नाटो की आधुनिक हवाई रणनीति के लिए केंद्रीय हैं.न तो यू.के. रक्षा मंत्रालय और न ही लॉकहीड मार्टिन ने आपातकालीन लैंडिंग की बारीकियों पर बयान जारी किए हैं.रविवार सुबह तक लड़ाकू विमान तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर खड़ा रहा.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।