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यूआईडीएआई ने माता-पिता और अभिभावकों से बच्चों के आधार बायोमेट्रिक्स अपडेट करने का आग्रह किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने उन बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पूरा करने पर बल दिया है, जो सात वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आधार में अपने बायोमेट्रिक्स अपडेट नहीं किए हैं। यह आधार के अंतर्गत आवश्यक है और माता-पिता या अभिभावक किसी भी आधार सेवा केंद्र या निर्दिष्ट आधार केंद्र पर अपने बच्चे का विवरण अपडेट कर सकते हैं।

से वर्ष की आयु के बच्चों के आधार बायोमेट्रिक्स निःशुल्क अपडेट करें

पाँच वर्ष से कम आयु का बच्चा फोटोग्राफ, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और प्रमाण के दस्तावेज़ प्रदान करके आधार के लिए नामांकन करा सकता है। पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के आधार नामांकन के लिए उनके फिंगरप्रिंट और आईरिस बायोमेट्रिक्स नहीं लिए जाते क्योंकि उस आयु तक वे परिपक्व नहीं होते।

इसलिए वर्त्तमान नियमों के अनुसार बच्चे के पाँच वर्ष की आयु पूरी होने पर उसके आधार में फिंगरप्रिंट, आईरिस और फोटोग्राफ अनिवार्य रूप से अपडेट किए जाने चाहिए। इसे पहला अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) कहा जाता है। यदि बच्चा पाँच से सात वर्ष की आयु के बीच एमबीयू करवाता है, तो यह निःशुल्क है। लेकिन सात वर्ष की आयु के बाद, केवल 100 रुपये का निर्धारित शुल्क है।

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बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एमबीयू का समय पर पूरा होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। यदि 7 वर्ष की आयु के बाद भी एमबीयू पूरा नहीं किया जाता है, तो वर्त्तमान नियमों के अनुसार आधार संख्या निष्क्रिय की जा सकती है।

नामांकन से अवसर तक – आधार हर कदम पर सशक्त बनाता है

अपडेट किए गए बायोमेट्रिक्स वाला आधार जीवन को आसान बनाता है और स्कूल में प्रवेश, प्रवेश परीक्षाओं के लिए पंजीकरण, छात्रवृत्ति का लाभ उठाने, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने में आधार के निर्बाध उपयोग को सुनिश्चित करता है। माता-पिता/अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों/आश्रितों के बायोमेट्रिक्स को आधार में प्राथमिकता के आधार पर अपडेट करें।

यूआईडीएआई ने ऐसे बच्चों के आधार में पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर एमबीयू प्रक्रिया पूरी करने के लिए एसएमएस संदेश भेजना शुरू कर दिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।