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बिहार में चुनाव आयोग ने आठ निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव के लिए ईवीएम-वीवीपैट का पहला यादृच्छिक परीक्षण पूरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के निर्देशों के अनुसार, राजस्थान, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम, ओडिशा और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आठ विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) ने 09 अक्टूबर से 16 अक्टूबर, 2025 तक ईवीएम-वीवीपैट का पहला यादृच्छिक परीक्षण पूरा कर लिया है।

पहला यादृच्छिक परीक्षण, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में डीईओ द्वारा ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से किया गया।

पहले यादृच्छिक परीक्षण के बाद, आठ विधानसभा क्षेत्रों को यादृच्छिक रूप से आवंटित ईवीएम एवं वीवीपैट का विवरण निम्न प्रकार है:

क्रम संख्याविधानसभा क्षेत्रमतदान केंद्रमतपत्र इकाइयां (बीयू)नियंत्रण

इकाइयां (सीयू)

वीवीपैट
1.27-बडगाम173276276276
2.77-नगरोटा150240240240
3.71-नुआपाड़ा358572572608
4.45-घाटशिला (एसटी)300390390420
5.61-जुबली हिल्स407569569610
6.21-तरनतारन222266266288
7.02-डम्पा (एसटी)41828282
8.193-अंता268348348375

यादृच्छिक ईवीएम एवं वीवीपैट की निर्वाचन क्षेत्रवार सूची संबंधित जिला मुख्यालयों पर सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई।

इन ईवीएम एवं वीवीपैट को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संबंधित विधानसभा के स्ट्रांग रूम में संग्रहित किया जाएगा।

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप प्रदान करने के बाद, प्रथम यादृच्छिक ईवीएम एवं वीवीपैट की सूची भी सभी उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।