मुंबई. राष्ट्रवादी नेता नवाब मलिक को मुंबई की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. विशेष पीएमएलए कोर्ट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और पूर्व मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय कर दिए हैं. इससे पहले कोर्ट ने मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा दायर डिस्चार्ज एप्लीकेशन को खारिज कर दिया था. यह कंपनी भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपियों में शामिल है. कोर्ट ने सभी आरोपियों, जिनमें नवाब मलिक भी शामिल हैं के विरुद्ध आरोप तय करने के आदेश दिए थे, जिसके लिए आज की तारीख निर्धारित थी.
मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने दलील दी थी कि ईडी का मामला अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित है और कथित अवैध गतिविधि के समय कंपनी अस्तित्व में ही नहीं थी. हालांकि, विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर ने पाया कि आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि नवाब मलिक ने डी-कंपनी से जुड़ी हसीना पारकर, सलीम पटेल और आरोपी सरदार खान के साथ मिलकर गैरकानूनी तरीके से हासिल की गई संपत्ति की मनी लॉन्ड्रिंग की जिसे अपराध की आय माना गया है.
नवाब मलिक ने खुद को बताया निर्दोष
इस बीच, नवाब मलिक ने चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया को 6 हफ्ते आगे बढ़ाने की मांग की और खुद को निर्दोष बताया. मुंबई की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मलिक के खिलाफ पीएमएलए अधिनियम 2002 की धारा 3, 4 और 17 के तहत आरोप तय कर दिए हैं. मामले के एक अन्य आरोपी, जो 1993 बम धमाके मामले में सजा काट रहा है और आज अदालत में पेश नहीं हो सका, उसके लिए आरोपों से संबंधित दस्तावेज जेल भेजे जाएंगे और वहीं उसका बयान दर्ज किया जाएगा.
बता दें, इस बीच नवाब मलिक के वकीलों ने अनुरोध किया कि उच्च न्यायालय का फैसला आने या सरकारी वकील के बयान दर्ज होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित कर दी जाए. हालांकि, सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने सख्ती से कहा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हर हाल में 4 हफ्तों के भीतर आरोप तय किए जाएं. हमारे पास पहले से ही एक बड़ा मामला है.
साभार : जी न्यूज
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