रायपुर. छत्तीसगढ़ और ओडिशा बॉर्डर पर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. इस गोलीबारी में दोनों राज्यों की पुलिस ने 16 नक्सलियों को मार गिराया है. इसमें एक करोड़ रुपए का इनामी नक्सली भी ढेर हुआ है. जो नक्सली मारे गए हैं उनमें गुड्डू, मोहन जैसे खूंखार नक्सली भी है.
आइए जानते हैं इसके बारे में…
मारे गए 16 नक्सलियों में से एक की पहचान हो गई है. इसमें एक करोड़ रुपए का इनामी नक्सली जयराम उर्फ चलपति भी है. इसके मारे जाने के बाद अब इसी बात की चर्चा है कि आखिर ये नक्सली कौन था? छत्तीसगढ़ की पुलिस ने इस बारे में एक विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि ये नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी का मेंबर है. इसके सिर पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित है.ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितना खूंखार था.
1 करोड़ का इनामी चलपति का असली नाम जयाराम रेड्डी था, उसे संगठन में रामचंद्र रेड्डी अप्पाराव या रामू के नाम से भी जाना जाता था. आंध्र प्रदेश के चिंत्तूर जिले के माटेमपल्ली गांव के रहने वाले रेड्डी ने केवल 10वीं तक पढ़ाई की लेकिन सेंट्रल कमेटी का मेंबर बना. 60 साल का चलपति बस्तर के अबूझमाड़ के घने और दुर्गम जंगलों में सक्रिय था और हर वक्त AK-47 और SLR जैसी आधुनिक हथियार से लैस रहता था, उसकी सुरक्षा में 8 से 10 गार्ड हमेशा तैनात रहते थे.
अबूझमाड़ में लगातार हो रही मुठभेड़ की वजह से कुछ महीनों पहले चलपति ने अपना ठिकाना बदल लिया और गरियाबंद-ओडिशा बॉर्डर पर चला गया था, यह कदम उसकी सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया था. चलपति नक्सली संगठन का फ्रंटलाइन लीडर था. उसने संगठन की रणनीतियों को बनाने और संचालन करने में अहम भूमिका निभाई उसके नेतृत्व में नक्सलियों ने कई बड़े हमले को अंजाम दिया. चलपति की रणनीतिक कुशलता, नेतृत्व क्षमता और संसाधनों को जुटाने की क्षमता ने उसे माओवादियों का अहम चेहरा बना दिया. उसे सुरक्षा बलों के लिए भी एक बड़ा खतरा माना जाता था. इसलिए उसकी सूचना देने पर 1 करोड़ रु. का भारी भरकम इनाम रखा गया था. चलपति नक्सलियों के सबसे कुख्यात और वांछित नेताओं में शुमार था.
अरुणा से किया था विवाह
अपनी आईडियोलॉजी के कारण संगठन के सिर्फ नेताओं का चाहता रहा. संगठन में रहते हुए वहीं उसने अपने से बहुत ही कम उम्र की छोटे कैडर की अरुणा से विवाह कर लिया. इसके बाद संगठन के नेताओं ने उसे डिमोट कर दिया. लेकिन नक्सली संगठन की आईडियोलॉजी और उसकी भूमिका को देखते हुए फिर से उसे केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाया गया था. छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी संगठन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका में रखा गया था.
खतरनाक नक्सली में थी गिनती
उसकी गिनती देश के बेहद खतरनाक नक्सली कमांडरों में होती थी. सुरक्षाबलों पर कई हमलों में शामिल रहा है. ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में ये बेहद सक्रिय था. दो राज्यों की पुलिस इसकी तलाश कर रही थी. अब ये मुठभेड़ में ढेर हो गया है. इसका एकाउंटर दोनों राज्यों की पुलिस की सबसे बड़ी सफलता है. इस सफलता पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने जवानों की टीम को बधाई दी है.
हमले की बनाता था योजना
पुलिस अफसरों से मिली जानकारी के मुताबिक ये कई बड़े हमलो का मास्टर माइंड रहा है.ओडिशा सहित छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन की मजबूती के लिए काम करता था. बड़ा साजिशकर्ता भी रहा है. इसने अपने संगठन में कई लड़ाकों को शामिल करवाया है. इसका एनकाउंटर पुलिस की सबसे बड़ी सफलता है.
साभार : एनडीटीवी
भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं