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राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सभी फरवरी में जाएंगे महाकुंभ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. महाकुंभ में संगम स्नान के लिए PM मोदी 5 फरवरी को आएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 10 फरवरी तो उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 1 फरवरी को आएंगे। इससे पहले 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह संगम में स्नान करेंगे। इन संभावित दौरों को देखते हुए प्रशासनिक अफसरों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी नए तरीके से रिव्यू में जुट गई हैं। गंगा जल की रोज जांच कराई जा रही है। अब जांच टीम में ATS भी शामिल हो गए हैं। शाह के कार्यक्रम का शेड्यूल जारी हो चुका है। वह संगम स्नान, गंगा पूजा के बाद अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे।

रविवार को प्रयागराज पहुंचे मुख्यमंत्री ने पहले मेला क्षेत्र का भ्रमण किया और फिर अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा- आगामी दिनों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का प्रयागराज आगमन प्रस्तावित है। 22 जनवरी को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक भी यहां होगी। इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां समय से कर लें। उन्होंने कहा- मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी के अवसर पर अमृत स्नान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता चाहिए। भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से इन विशेष दिवसों पर पांटून पुल पर आवागमन वन-वे रखा जाए। पूरे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित करें।

महाकुंभ का आज 9वां दिन है। सुबह 8 बजे तक 16 लाख लोगों ने स्नान किया। अब तक 9 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। इस बार 45 से 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने जताया है। CM योगी ने मौनी अमावस्या पर करीब 8-10 करोड़ श्रद्धालुओं के महाकुंभ में आने की संभावना जताई है। CM ने निर्देश दिए हैं कि रेलवे से कोऑर्डिनेट करके ट्रेनों को चलाएं। मोबाइल नेटवर्क मजबूत करें। हर सेक्टर में 24 घंटे बिजली और पानी की सप्लाई बनाए रखें। घाटों की बैरिकेडिंग करें। हर जिले से बसें चलाएं। साथ ही प्रयागराज में ई-बसें, शटल बसें लगातार चलती रहें।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।