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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बदला निचली अदालत का फैसला: सरभोका ज्योति मिशन स्कूल के फादर को उम्रकैद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरिया जिले के एक निजी स्कूल में हुए नौ साल पुराने जघन्य यौन उत्पीड़न मामले में न्याय की मिसाल पेश की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने इस मामले में अपराध को छिपाने और पीड़िता की मदद करने के बजाय उसे प्रताड़ित करने वाली दो महिला कर्मचारियों (सिस्टर फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया) को भी सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

निचली अदालत का फैसला रद्द: “तकनीकी आधार पर न्याय की अनदेखी नहीं”

बता दें कि कोरिया के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के छात्रावास में 2015 में कक्षा चौथी की छात्रा के साथ यह दरिंदगी हुई थी। 2017 में बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ‘साक्ष्यों के अभाव’ का हवाला देते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया था। राज्य शासन ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि:

“निचली अदालत ने पीड़िता के ठोस बयानों और पुख्ता मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था। एक दुष्कर्म पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है।”

मेडिकल और FSL रिपोर्ट बनीं मुख्य आधार

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में डॉ. कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट को आधार बनाया, जिसमें बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई थी। साथ ही, FSL रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर मिले शुक्राणुओं ने अपराध की पुष्टि कर दी।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

  • वारदात: 9 सितंबर 2015 को स्कूल छात्रावास में मासूम से दुष्कर्म।

  • अमानवीय व्यवहार: पीड़िता ने जब स्कूल की दो नन से शिकायत की, तो मदद के बजाय उसे छड़ी से पीटा गया और चुप रहने को कहा गया।

  • जुर्माना: मुख्य दोषी पर 10 हजार और अन्य दो पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना।

कोर्ट का अल्टीमेटम:

हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। यदि वे नियत समय में आत्मसमर्पण नहीं करते, तो पुलिस को उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।