रविवार, सितंबर 20 2026 | 09:58:02 PM

चंद्रबाबू नायडू उपराष्ट्रपति चुनाव में करेंगे एनडीए प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन का समर्थन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति पद का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी के नाम की घोषणा किए जाने के बाद इस मुकाबले में नया मोड़ आ गया है। आंध्र प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।

सुदर्शन रेड्डी का नाम सामने आने के बाद चंद्रबाबू नायडू के अगले कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या वो विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे या फिर अपने सहयोगी गठबंधन के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का साथ देंगे। क्योंकि विपक्ष को उम्मीद है कि आंध्र प्रदेश में जन्मे जस्टिस रेड्डी के चयन से टीडीपी को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इस मामले को लेकर टीडीपी ने अपना रुख साफ कर दिया है।

क्या कहा टीडीपी ने?

आंध्र प्रदेश में मंत्री और टीडीपी के महासचिव नारा लोकेश ने हाल ही में एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और एकजुटता का संदेश दिया। एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “कोई अस्पष्टता नहीं- केवल गर्मजोशी, सम्मान और गर्व। एनडीए एकजुट है।”

विपक्ष ने क्यों चली ये चाल?

एक तरफ जहां भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने राधाकृष्णन का नाम घोषित करके साउथ का कार्ड चला और तमिलनाडु में कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के लिए दुविधा पैदा की। तो वहीं कुछ घंटों बाद इंडी गठबंधन ने भी काउंटर करते हुए साउथ वाली चाल चली और सुदर्शन रेड्डी के नाम का एलान करके एनडीए की सहयोगी टीडीपी के लिए परेशानी खड़ी करने की कोशिश की। इस कदम के पीछे का मकसद विपक्ष से गठबंधन न रखने वाली तेलुगु भाषी पार्टियों का समर्थन जुटाना था।

- Advertisement -

इसमें मुख्य टारगेट एनडीए की सहयोगी टीडीपी थी। अब टीडीपी के सामने भी वही सवाल था, जो डीएमके के सामने था कि क्या वो अपने स्थानीय उम्मीदवार के खिलाफ वोटिंग करेगी? ऐसे में टीडीपी ने वही किया जो डीएमके ने किया। डीएमके ने अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि वो राधाकृष्णन के चयन को भाषा या स्थानीय उम्मीदवार के चश्मे से नहीं बल्कि एक राजनीतिक नजरिए से देखती है।

साभार : दैनिक जागरण

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।