रविवार, सितंबर 20 2026 | 11:55:23 PM

समाचार चैनलों को उर्दू शब्दों पर नोटिस का दावा निकला गलत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है  जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि सरकार ने कुछ हिंदी समाचार चैनलों को ज्यादा उर्दू शब्दों के इस्तेमाल के लिए नोटिस भेजा है। चैनलों को भाषा विशेषज्ञ नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस सोशल मीडिया पोस्ट का फैक्ट चेक किया जिसमें ये दावा गलत साबित हुआ है। PIB ने बताया कि इस पोस्ट में कही गयी बातें गलत और भ्रामक हैं।

PIB फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने पोस्ट लिखा कि मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक दर्शक की शिकायत से संबंधित नोटिस चैनलों को भेजी है और चैनलों को निर्देश दिया गया है कि वे शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई से अवगत कराएं और संबंधित नियमों के अनुसार मंत्रालय को भी सूचित करें। सरकार ने किसी एक शिकायतकर्ता की शिकायत पर चैनलों को नोटिस भेजा ना कि उर्दू के इस्तेमाल के लिए।

SHABD, September 21, 2025

 

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

 

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।