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शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग को लेकर झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव पास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रांची. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद उनके सम्मान में भारत रत्न देने की मांग उठ रही है. इस बीच राज्य के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा है कि राज्य भर के सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम में शिबू सोरेन की जीवनी को शामिल किया जाएगा. मंत्री ने कहा, ”जो तकनीकी मसले हैं, निश्चित तौर पर सरकार उसका हल निकालेगी.एनसीईआरटी में जाना पड़े या अन्य जगहों में जाना पड़े. मेरा स्पष्ट मानना है कि मेरा स्पष्ट विश्वास है कि दिशोम गुरु के जीवन के संघर्षों को वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को अवश्य जानना चाहिए. कैसे उन्होंने 50 साल पहले नेमरा से संघर्ष शुरू किया, जननायक की भूमिका में राज्य को अलग कराने में भूमिका निभाई. उनकी जीवनी बच्चों को पढ़नी चाहिए.”

विधानसभा में किसने क्या कहा?

आज (22 अगस्त) ही झारखंड विधानसभा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठी. न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रकाश के दौरान यह मांग रखी. उन्होंने कहा कि समाज सुधार, आदिवासी एवं वंचित समाज के हक-हुकूक और अलग राज्य के लिए आंदोलन में शिबू सोरेन ने महती भूमिका निभाई. उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए उन्हें भारत रत्न देने के लिए सदन की ओर से सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए.

किसने किया समर्थन?

सदन में मौजूद कई सदस्यों ने मेज थपथपाकर इस मांग पर समर्थन जताया. जनता दल यूनाइटेड के विधायक सरयू राय ने भी शोक प्रकाश के दौरान अपने वक्तव्य में कहा कि दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध रहे शिबू सोरेन के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए. सरयू राय ने उन्हें भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया. आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो ने भी सदन से आग्रह किया कि शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी पारसनाथ की चोटी पर शिबू सोरेन और शीर्ष झारखंड आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की. इसके पूर्व सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने वक्तव्य में नशाबंदी, आदिवासी समाज के उत्थान और झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में शिबू सोरेन के योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।