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वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का कटरा से श्रीनगर रेलवे स्टेशन के बीच सफल रहा पहला ट्रायल रन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. श्री माता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर रेलवे स्टेशन के बीच विशेष रूप से डिजाइन की गई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का पहला ट्रायल रन सफल रहा। इंडियन रेलवे ने शनिवार को इसके सफल ट्रायल की जानकारी दी। यह ट्रेन अपने सफर में चेनाब पुल से होकर गुजरी, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल है। स्पेशल वंदे भारत अंजी खाद पुल से भी गुजरी, देश का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज है। ट्रेन सुबह करीब 11:30 बजे जम्मू में कुछ देर के लिए रुकी, जहां इसका स्वागत में लोगों ने जमकर नारेबाजी की। रेलवे के मुताबिक, ट्रायल पूरा होने के बाद इसके कमर्शल ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। जल्द ही पीएम नरेंद्र मोदी कटरा से इस ट्रेन के पहले सफर को हरी झंडी दिखाएंगे, हालांकि अभी इसकी तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।

दूसरे वंदे भारत से अपग्रेडेट है खास ट्रेन

कटरा से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को खास तरीके से डिजाइन किया गया है। यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर की चुनौतीपूर्ण सर्दियों में अपनी फुल स्पीड से दौड़ेगी। देश के अन्य हिस्सों में चलने वाली अन्य वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में इस ट्रेन में कई विशेष सुविधाएं डिवेलप की गईं हैं। रेलवे के मुताबिक, इसमें एडवांस्ड हीटिंग सिस्टम शामिल हैं , जो पानी और बायो-टॉयलेट टैंकों को जमने से रोकते हैं। साथ ही, वैक्यूम सिस्टम के लिए गर्म हवा प्रदान करते हैं । इसके अलावा स्पेशल वंदे भारत में एयर ब्रेक सिस्टम लगाया गया है, जो जीरो डिग्री टेंपरेचर में भी सुचारू संचाल सुनिश्चित करेंगे। ट्रेन में विंडशील्ड में एम्बेडेड हीटिंग एलिमेंट भी हैं, जो ड्राइवर के सामने के लुकआउट ग्लास को ऑटोमैटिक डीफ़्रॉस्ट करते हैं। इन सुविधाओं से कड़ाके की ठंड में भी क्लियर विजिबिलिटी सुनिश्चित होती है।

कश्मीर को देश से जोड़ने का बड़ा प्लान

इसके अलावा, ट्रेन में मौजूदा वंदे भारत ट्रेनों की अन्य सुविधाओं जैसे एयरकंडिशन कोच, ऑटोमैटिक गेट और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट से भी लैस है। रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्पेशल वंदेभारत जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और आर्थिक अंतर को पाटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह ट्रेन 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है , जिसका उद्देश्य कश्मीर घाटी को व्यापक भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।