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नक्सली संगठन जेजेएमपी का प्रमुख पप्पू लोहरा को सुरक्षाबलों ने किया ढेर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची. झारखंड के लातेहार जिले में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में ‘झारखंड जन मुक्ति परिषद’ (JJMP) के शीर्ष नेता पप्पू लोहरा समेत दो नक्सली मारे गए. पप्पू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि माओवादी समूह JJMP का प्रमुख लोहरा और उसका एक अन्य सहयोगी लातेहार पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक जंगल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और झारखंड पुलिस के नक्सल रोधी संयुक्त अभियान के दौरान मारे गए. पलामू के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) वाई एस रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 2 माओवादी मारे गए. पुलिस ने उनके शव बरामद कर लिए हैं.

पुलिस को देखते ही गोलीबारी की

DIG ने बताया कि लोहरा और उसके साथियों के जंगल में होने की सूचना मिलने पर लातेहार के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव के नेतृत्व में सुरक्षाकर्मियों की एक टीम ने  सर्च अभियान शुरू किया.  पुलिस ने कहा, ‘‘जैसे ही माओवादियों ने सुरक्षाकर्मियों को देखा, उन्होंने उन पर निशाना साधते हुए गोलीबारी की जिसके बाद सुरक्षाबलों के कर्मियों ने भी जवाबी कार्रवाई की. मुठभेड़ में लोहरा और JJMP का एक अन्य सदस्य प्रभात गंझू मारा गया. इस बीच, रांची में सूत्रों ने बताया कि समूह का एक और सदस्य घायल हुआ है जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उसके पास से एक इंसास राइफल बरामद की गई है.

बड़ी साजिश को अंजाम देने की थी तैयारी

पप्पू लोहार अपने ग्रुप  के सदस्यों के साथ इचावार के जंगल में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में लगा था. इस सूचना पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने सर्च अभियान  शुरू किया. अभियान के दौरान जैसे ही उग्रवादियों ने जवानों को देखा, उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला. बता दें, हाल के समय में छत्तीसगढ़ के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों ने बड़ी संख्या में नक्सलियों को मुठभेड़ों में ढेर किया है, वहीं हजारों उग्रवादियों ने समर्पण भी किया है. कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने 27 नक्सलियों को मार गिराने में सफलता हासिल की.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।