लोड हो रहा है...

झारखंड में रिम्स-2 का विरोध करने पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन हाउस अरेस्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को हाउस अरेस्ट किया गया है. इसके साथ-साथ उनके बेटे को भी हाउस अरेस्ट में रखा गया है. इसके पीछे की वजह चंपई सोरेन रिम्स 2 जमीन विवाद को लेकर रांची में हल चलाने वाले थे, जहां उनके साथ हजारों लोगों के जुटने की आशंका थी. इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट किया है. पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चंपई सोरेन ने अपनी नजरबंदी पर कहा, “जब डीएसपी साहब यहां आए और कहा कि मुझे आज हिलना-डुलना नहीं है, यानी मुझे घर से बाहर नहीं निकलना है, तो मैं समझ गया कि वह मुझे कहीं नहीं जाने देंगे. इसलिए मैंने कहा कि ठीक है. अगर प्रशासन और सरकार ने कोई फैसला ले लिया है, तो हम उसका उल्लंघन नहीं करेंगे.

नजरबंदी को लेकर पुलिस ने क्या कहा?

चंपई सोरेन को लेकर पुलिस ने बताया कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चंपई सोरेन को रविवार को भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए नजरबंद कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि उनके बेटे बाबूलाल सोरेन और रांची जा रहे समर्थकों को भी एक पुलिस थाने में हिरासत में लिया गया है. उन्होंने बताया कि रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए हैं. हालांकि, सोरेन ने इस कदम को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि आदिवासियों और उनके विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के कारण उन्हें नजरबंद किया गया है.

किस कारण किया गया नजरबंद?

पूर्व सीएम चंपई सोरेन रिम्स-2 के लिए अधिग्रहित जमीन को लेकर विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इस अधिग्रहण में नियमों का पालन नहीं किया गया है. रिम्स-2 को बनाने के लिए नगड़ी में जमीन प्रस्तावित है. पूर्व सीएम इसी प्रस्तावित जमीन पर हल चलाकर किसानों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने वाले थे.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।