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“सोच बदलो, ऊर्जा बदलेगी, ग्रह बदलेंगे, परिणाम बदलेंगे” प्रख्यात ज्योतिषाचार्य भूमिका कलम के सूत्र से मिली नई ऊर्जा

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– जब उत्तर नहीं मिलते, तो साधना में शिव मिलते हैं; शिव सत्व से अवगत हुए दर्शक
– नागपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ‘शिव चेतना और सावन के स्वर्णिम रहस्य’ कार्यक्रम

नागपुर, 25 जुलाई, 2025: कई बार जीवन ऐसे मोड़ पर खड़ा होता है, जहाँ न सवाल थमते हैं, न ही कोई रास्ता दिखाई देता है। ऐसे में, कोई एक क्षण, एक अनुभव, भीतर की सारी उलझनों को सुलझा सकता है, जरूरत होती है तो उस मौन को सुनने की, जहाँ शिव निवास करते हैं। नागपुर में यही अनुभव मिला, जब हाल ही में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य, ध्यान साधिका और एस्ट्रोभूमि की संस्थापिका भूमिका कलम के नेतृत्व में ‘शिव चेतना और सावन के स्वर्णिम रहस्य’ नामक एक विशेष आयोजन संपन्न हुआ, जहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को शिव चेतना और सावन के अद्भुत सहस्यों को जानने का सुअवसर मिला।

सावन में ज्योतिष के उपाय क्यों सबसे अधिक कारगर होते हैं और क्यों इस महीने में ही क्यों भगवान शिव की भक्ति की जाती है? इस विषय पर प्रख्यात ज्योतिषाचार्य और ध्यान साधिका भूमिका कलम जी ने विस्तार से बताते हुए कहा, “इस समय सूर्य कर्क राशि में होता है और कर्क चंद्रमा की राशि है। चंद्रमा मन, जल और भावनाओं का कारक है, इसलिए यह महीना मन को छूने वाला होता है। इस समय मन उस अवस्था में होता है कि जो भी कार्य हम करते हैं, वे बहुत जल्दी फलित होते हैं। यही कारण है कि इस महीने में की गई साधना, ध्यान और ज्योतिषीय उपाय शीघ्र फलदायक होते हैं। जब मन बेचैन हो, दिशा धुँधली हो और भीतर उलझनों का कोलाहल हो, तब जरूरत होती है शिव से जुड़ने की। शिव चेतना का अर्थ है: पूर्ण स्वीकृति, मौन और जागरूकता।”

ध्यान की विधि में उन्होंने एक विशेष आवृत्ति दी और ध्यान करवाया, जिससे सभी लोगों को सुकून का अद्भुत अनुभव हुआ। सभी लोग अंतःस्थिति तक पहुँचे। उन्होंने सावन में ग्रहों के निवारण के उपाय भी बताए, जैसे- सोमवार व्रत कैसे करें और घर में रुद्राभिषेक कैसे करें। इस आयोजन के दौरान रुद्राक्ष धारण करने का सही समय और मंत्र-जाप की महत्ता भी जानने को मिली। शिव पर जल कैसे चढ़ाएँ, कौन-से मंत्र पढ़ें, इस पर भी विशेष मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने बताया, “सावन के महीने में रुद्राक्ष धारण करने से आपके शरीर की ऊर्जाएँ तारतम्यपूर्ण हो जाती हैं। भगवान शिव ऊर्जा की अवस्था हैं, जो हमारे भीतर की अशांति को दूर करते हैं और जब आप शिव से जुड़ते हैं तो भीतर की उलझनें स्वयं ही शांत हो जाती हैं।” उनका यह कथन श्रोताओं के हृदय में उतर गया।

“सोच बदलो, ऊर्जा बदलेगी, ग्रह बदलेंगे, परिणाम बदलेंगे”, भूमिका जी ने इस सूत्र पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उनकी इस सरल लेकिन गहन सीख ने कई मनों को स्पर्श किया। जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के सूत्र बताते हुए उन्होंने दर्शकों से अपील की कि हर दिन कम से कम पाँच मिनट अपने लिए जरूर निकालना चाहिए, जिसमें आप मौन रहकर ध्यान करें, शिव आपको स्वयं ही मिल जाएँगे।

कार्यक्रम में भगवान शिव की पौराणिक कहानियाँ भी सुनाईं। सावन के ज्योतिषीय महत्व और स्वर्णिम रहस्यों से शिव भक्त अवगत हुए और उन्होंने जाना कि ग्रहों की स्थिति इस समय ध्यान और प्रार्थना के लिए सबसे अनुकूल होती है। साथ ही, इस समय मंत्र जाप और जल अर्पण सबसे ज्यादा असरकारक होते हैं।

कुल मिलाकर, भगवान शिव को समर्पित यह संध्या सिर्फ एक आयोजन मात्र नहीं थी, यह एक आंतरिक यात्रा का सुखद निमंत्रण थी, जिसने सावन के अध्यात्म को जीवन के वास्तविक अर्थ के रूप में प्रदर्शित किया। इसके माध्यम से सभी शिव भक्तों ने शिव तत्व को समझा और इसे अपने जीवन में आत्मसात किया, साथ ही सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त की।

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