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भारत निर्वाचन आयोग बिहार विधानसभा चुनाव सहित कुछ राज्यों में उपचुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की करेगा तैनाती

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) संविधान के अनुच्छेद 324 द्वारा उसे प्रदत्त पूर्ण शक्तियों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत एक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव के संचालन पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती करता है।

  1. पर्यवेक्षक अपनी नियुक्ति से लेकर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक आयोग के अधीक्षण, नियंत्रण और अनुशासन के अधीन कार्य करते हैं।
  2. पर्यवेक्षकों को चुनावों की निष्पक्षता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण और गंभीर ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, जो अंततः हमारी लोकतांत्रिक राजनीति का आधार है। वे आयोग की आँख और कान के रूप में कार्य करते हैं और समय-समय पर और आवश्यकतानुसार आयोग को रिपोर्ट करते रहते हैं।
  3. पर्यवेक्षक न केवल आयोग को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी चुनाव आयोजित करने के अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में मदद करते हैं, बल्कि चुनावों में मतदाता जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने में भी योगदान करते हैं।
  4. पर्यवेक्षकों का मुख्य उद्देश्य सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और ठोस तथा क्रियाशील सिफारिशें तैयार करना है।
  5. अपनी वरिष्ठता और प्रशासनिक सेवाओं में लंबे अनुभव के कारण, सामान्य और पुलिस पर्यवेक्षक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन में आयोग की सहायता करते हैं। वे जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया के कुशल और प्रभावी प्रबंधन की भी निगरानी करते हैं।
  6. व्यय पर्यवेक्षक उम्मीदवारों द्वारा किए गए चुनावी खर्चों का निरीक्षण करने के लिए नियुक्त किए जाते हैं।
  7. भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा के आगामी आम चुनाव और जम्मू-कश्मीर (एसी-बडगाम और नगरोटा), राजस्थान (एसी-अंता), झारखंड (एसी-घाटशिला), तेलंगाना (एसी-जुबली हिल्स), पंजाब (एसी-तरन तारन), मिजोरम (एसी-दम्पा) और ओडिशा (एसी-नुआपाड़ा) में होने वाले उपचुनावों के लिए विभिन्न राज्यों में कार्यरत 470 अधिकारियों (320 आईएएस, 60 आईपीएस और 90 आईआरएस/आईआरएएस/आईसीएएस आदि से) को केंद्रीय पर्यवेक्षकों (सामान्य, पुलिस और व्यय) के रूप में तैनात करने का निर्णय लिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।