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आयुष्मान वय वंदना योजना के शुभारम्भ के बाद से अब तक 1.06 लाख से अधिक दावों का निपटारा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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केंद्र सरकार ने 29 अक्टूबर 2024 को आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) का दायरा बढ़ाते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, इसमें शामिल कर लिया। इस पहल के तहत, लाभार्थियों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड के माध्यम से प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, एबी-पीएमजेएवाई की पोर्टेबिलिटी सुविधा वय वंदना योजना के तहत आने वाले लाभार्थी सहित सभी पात्र लाभार्थियों को देश भर के 31,466 सूचीबद्ध अस्पतालों में से किसी में भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने की सुविधा देती है, चाहे वे देश में कहीं भी रहते हों। इससे देश भर के बुजुर्ग लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक निर्बाध और समान पहुंच सुनिश्चित होती है।

वय वंदना योजना के लाभार्थी इस योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध 14,194 निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के विशाल नेटवर्क के माध्यम से भी उपचार प्राप्त कर सकते हैं। सेवा वितरण में गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के अंतर्गत पैनल में अस्पतालों को शामिल करने हेतु व्यापक अस्पताल पैनलीकरण और प्रबंधन (एचईएम) दिशानिर्देश जारी किए हैं।

आयुष्मान वय वंदना योजना के शुभारंभ के बाद से अब तक 1.06 लाख से अधिक दावों का निपटारा किया जा चुका है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।