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छत्तीसगढ़ में 37 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, पिछले 23 महीनों में 2200 से अधिक मुख्यधारा में लौटे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रायपुर. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया, जिनमें से 27 पर कुल मिलाकर 65 लाख रुपये का इनाम था। दंतेवाड़ा के पुलिस सुपरिटेंडेंट गौरव राय ने बताया कि 12 महिलाओं समेत इन नक्सलियों ने “पूना मार्गेम” (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्मिलन तक) पहल के तहत यहां सीनियर पुलिस और CRPF अधिकारियों के सामने सरेंडर किया।

उन्होंने कहा कि बस्तर रेंज पुलिस द्वारा शुरू की गई यह पहल बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति, सम्मान और व्यापक प्रगति स्थापित करने के लिए एक बदलाव लाने वाली मुहिम के रूप में उभर रही है। सरेंडर करने वालों में कुमाली उर्फ अनीता मंडावी, गीता उर्फ लक्ष्मी मड़कम, रंजन उर्फ सोमा मंडावी और भीमा उर्फ जहाज कलमू शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि इन सभी पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।

रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के तहत सरेंडर

उन्होंने कहा कि सरकार की रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के तहत, सरेंडर करने वाले कैडरों को तुरंत 50,000 रुपये की मदद के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग, खेती की जमीन वगैरह जैसी दूसरी सुविधाएं भी दी जाएंगी। अधिकारी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सरेंडर और रिहैबिलिटेशन पॉलिसी से प्रेरित होकर, पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में 508 से ज्यादा माओवादी, जिनमें से 165 पर इनाम था, हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।

23 महीनों में 2,200 से ज्यादा नक्सलियों ने किया सरेंडर

राय ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादियों ने, सीनियर नेताओं से लेकर अपने बेस एरिया में एक्टिव कैडर तक, इस गैरकानूनी संगठन को छोड़ दिया है। पुलिस के मुताबिक, पिछले 23 महीनों में छत्तीसगढ़ में टॉप कैडर समेत 2,200 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है। केंद्र ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है।

साभार :दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।