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सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि 39 वर्षों की अनुकरणीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि आज सेवानिवृत्त हो गए। इसके साथ ही उनके उनतीस वर्षों के शानदार सैन्य करियर का समापन हो गया। इस अवसर पर उन्होंने उप-सेना प्रमुख (वीसीओएएस) का पद भी छोड़ा।

जनरल ऑफिसर की वर्दी में उनकी विशिष्ट यात्रा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से शुरू हुई और दिसंबर 1985 में उन्हें गढ़वाल राइफल्स में कमीशन दिया गया। असाधारण शैक्षणिक क्षमता वाले अधिकारी के रूप में उन्होंने किंग्स कॉलेज, लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल. की डिग्री प्राप्त की है।

अपने पूरे कार्यकाल के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने विविध परिचालन और भू-भाग प्रोफाइलों में कमांड, स्टाफ और अनुदेशात्मक पदों की एक विस्तृत श्रृंखला संभाली है। रणनीतिक और सामरिक गतिशीलता, विशेष रूप से पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर उनकी गहरी समझ ने परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राष्ट्र की उत्कृष्ट सेवा के सम्मान में जनरल ऑफिसर को परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

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भारतीय सेना ने लगभग चार दशकों की उनकी अनुकरणीय सेवा के लिए प्रशंसा की और उनके सभी भावी प्रयासों में निरंतर सफलता और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।