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जवाबी कार्रवाई: ईरान ने कनाडा की ‘रॉयल कैनेडियन नेवी’ को घोषित किया आतंकवादी संगठन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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तेहरान. ईरान और कनाडा के बीच कूटनीतिक कड़वाहट एक नए स्तर पर पहुंच गई है। मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर कनाडा की नौसेना, जिसे ‘रॉयल कैनेडियन नेवी’ कहा जाता है, को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित कर दिया है।

ईरान का यह कदम सीधे तौर पर जून 2024 में कनाडा द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी सूची में डालने का पलटवार माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम और ईरान का पक्ष

ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह निर्णय ‘पारस्परिकता के सिद्धांत’ (Principle of Reciprocity) के तहत लिया गया है। ईरान ने अपनी कार्रवाई के समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: ईरान का तर्क है कि कनाडा ने 2024 में ईरान की आधिकारिक सेना (IRGC) को प्रतिबंधित कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया था।

  • जवाबी कानून: तेहरान ने 2019 के एक घरेलू कानून का हवाला दिया, जो सरकार को उन देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की शक्ति देता है जो अमेरिका के नक्शेकदम पर चलते हुए ईरानी सैन्य अंगों को निशाना बनाते हैं।

  • प्रतिक्रिया: ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओटावा का फैसला अवैध था, इसलिए वे अब कनाडा की नौसेना को एक आतंकवादी इकाई के रूप में पहचानते हैं।

विवाद की जड़: IRGC पर प्रतिबंध

कनाडा ने जून 2024 में IRGC को आतंकी सूची में शामिल किया था, जिसके बाद:

  1. IRGC के हजारों अधिकारियों के कनाडा में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

  2. कनाडा में मौजूद उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया गया।

  3. कनाडा ने ईरान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और फ्लाइट PS752 को मार गिराने का आरोप लगाया था (जिसमें 85 कनाडाई नागरिक मारे गए थे)।

तनाव का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस कदम से व्यावहारिक स्तर पर कनाडा की नौसेना पर शायद ही कोई सीधा प्रभाव पड़े, लेकिन यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य और राजनयिक दुश्मनी का प्रतीक है। ईरान और कनाडा के बीच 2012 से ही कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।

नोट: ईरान ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस घोषणा के बाद वह कनाडाई नौसैनिक कर्मियों या जहाजों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में क्या कानूनी या सैन्य कदम उठाएगा।

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।