लखनऊ. अयोध्या नगरी आज एक बार फिर त्रेतायुग के वैभव और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई। अवसर था प्रभु श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का। हालांकि प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल द्वादशी की तिथि आज (31 दिसंबर) होने के कारण इसे धार्मिक उल्लास के साथ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाया गया।
मुख्य कार्यक्रम और वीआईपी उपस्थिति
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे।
ध्वजारोहण: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राम मंदिर परिसर में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई।
महाभिषेक और आरती: सुबह 9:30 बजे से शुरू हुए अनुष्ठानों के बाद दोपहर 12 बजे रामलला का पंचामृत महाभिषेक किया गया। रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रभु की दिव्य आरती उतारी।
56 भोग: इस विशेष अवसर पर रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भव्य भोग लगाया गया।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को बधाई देते हुए इस दिन को “आस्था और संस्कारों का दिव्य उत्सव” बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आधुनिक भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का जीवंत प्रतीक है।
सुरक्षा और श्रद्धालुओं का उत्साह
वर्षगांठ के मौके पर अयोध्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सुरक्षा व्यवस्था: मंदिर परिसर और पूरी अयोध्या को 5 सुरक्षा जोन में बांटा गया था।
सांस्कृतिक आयोजन: 27 दिसंबर से शुरू हुआ यह पांच दिवसीय अनुष्ठान 2 जनवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें रामकथा, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है।
“500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद आज अयोध्या अपने गौरव को पुनः प्राप्त कर रही है। रामलला का विराजमान होना हमारी तीन पीढ़ियों के संघर्ष और 140 करोड़ देशवासियों के अटूट विश्वास की जीत है।”
— योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश)
अयोध्या राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत सूची और विवरण नीचे दिया गया है। ये कार्यक्रम ‘संस्कृति विभाग’ और ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए गए:
सांस्कृतिक उत्सव: ‘राम उत्सव – 2025’ की प्रमुख झलकियां
शास्त्रीय गायन एवं वादन (मंदिर प्रांगण)
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पद्म विभूषण कलाकारों की प्रस्तुति: देश के प्रख्यात शास्त्रीय गायकों द्वारा ‘राग सेवा’ अर्पित की गई। इसमें सुबह की बेला में ‘भैरव’ और शाम को ‘कल्याण’ राग में राम भजनों की प्रस्तुति दी गई।
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शहनाई वादन: मंदिर के सिंह द्वार पर सुबह 4 बजे से ही शहनाई की मधुर ध्वनि से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
‘रामलीला’ का वैश्विक संगम (राम की पैड़ी)
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अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुति: इस वर्ष केवल भारत ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका के कलाकारों ने अपनी क्षेत्रीय शैली में रामलीला का मंचन किया।
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डिजिटल मैपिंग: राम की पैड़ी पर लेजर शो के माध्यम से राम जन्मभूमि के संघर्ष और मंदिर निर्माण की गाथा को 3D तकनीक से दिखाया गया।
लोक नृत्य और क्षेत्रीय कलाएं
उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन हुआ:
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फरुआही और पाई-डंडा: अवध और बुंदेलखंड के लोक नर्तकों ने वीरता और उल्लास का प्रदर्शन किया।
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कथक अंजलि: बनारस और लखनऊ घराने के नर्तकों ने ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन’ पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया।
भव्य दीपोत्सव और आतिशबाजी
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2.25 लाख दीपक: वर्षगांठ की खुशी में सरयू तट और राम की पैड़ी को सवा दो लाख से अधिक दीयों से जगमगाया गया।
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ग्रीन आतिशबाजी: देर शाम सरयू के आकाश में इको-फ्रेंडली आतिशबाजी की गई, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।
प्रदर्शनी और गोष्ठी
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शिल्प मेला: राम कथा संग्रहालय में ‘राम शिल्प’ प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें देशभर के हस्तशिल्पियों ने राम दरबार की सुंदर मूर्तियां प्रदर्शित कीं।
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विद्वत संगोष्ठी: संतों और विद्वानों के बीच ‘राम मंदिर और विश्व शांति’ विषय पर चर्चा आयोजित की गई।
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